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एल्यूमनी मीट ने ताजा कीं 20 साल पुरानी यादें
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 28 Dec 2013 09:14 AM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में करीब 20 साल बाद पहुंचे एसपीएस भाटिया की नजरें पुराने साथियों को ढूंढ़ रही थीं, लेकिन उन्हें सहपाठी दिखाई नहीं दिए।
कुछ ऐसे भी पूर्व छात्र थे जो यूनिवर्सिटी से पासआउट होने के बाद पहली बार मिले थे।
मौका था यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्माश्यूटिकल और पीयू फार्मास्यूटिकल सोसाइटी की 1953 की डायमंड, 1963 की गोल्डन और 1988 की सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन का।
शुक्रवार को दोपहर बाद पीयू के लॉ ऑडिटोरियम में यह कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सुबह से ही पूर्व छात्र पहुंचना शुरू हो गए थे।
कार्यक्रम में 12 एलुमनी ने स्टेज से पुरानी यादों को ताजा किया। कार्यक्रम फार्मेसी विभाग के प्रो. वीआर सिन्हा, प्रो. रंजू बंसल और प्रो. कर्ण वशिष्ठ की देखरेख में हुआ।
1963 में पीयू से बी फार्मेसी करने वाले लुधियाना निवासी भगवान सिंह ने बताया कि उनके बैच में 15 स्टूडेंट थे। उनके बैच में कोई लड़की नहीं थी। अब पीयू का ढांचा बदल गया है, लेकिन विभाग वैसा ही है।
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वे पंजाब के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर के पद से रिटायर हुए हैं। करीब 20 साल बाद विभाग में लौटे 76 वर्षीय एसपीएस भाटिया असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर कम स्टेट ड्र्ग्स कंट्रोलर के पद से रियाटर हुए हैं। उन्होंने भी 1963 में ही एम फार्मेसी की डिग्री हासिल की थी।
डायमंड ईयर से नहीं पहुंचा कोई
एलुमनी इवेंट की कॉर्डिनेटर प्रो. रंजू बंसल ने बताया कि 53 बैच के स्टूडेंट उम्र दराज होने और मौसम खराब होने के कारण कोई नहीं पहुंचे। 63 बैच से केवल भगवान सिंह और एसपीएस भाटिया ही पहुंचे। 88 बैच से धीरत कुमार, डॉ. पूनम पिपलानी, डॉ. रंजू बंसल, मीना बंसल, संजय बंसल, रचना और गजेंद्र ने शिरकत की।
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कुछ ऐसे भी पूर्व छात्र थे जो यूनिवर्सिटी से पासआउट होने के बाद पहली बार मिले थे।
मौका था यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्माश्यूटिकल और पीयू फार्मास्यूटिकल सोसाइटी की 1953 की डायमंड, 1963 की गोल्डन और 1988 की सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन का।
शुक्रवार को दोपहर बाद पीयू के लॉ ऑडिटोरियम में यह कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सुबह से ही पूर्व छात्र पहुंचना शुरू हो गए थे।
कार्यक्रम में 12 एलुमनी ने स्टेज से पुरानी यादों को ताजा किया। कार्यक्रम फार्मेसी विभाग के प्रो. वीआर सिन्हा, प्रो. रंजू बंसल और प्रो. कर्ण वशिष्ठ की देखरेख में हुआ।
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1963 में पीयू से बी फार्मेसी करने वाले लुधियाना निवासी भगवान सिंह ने बताया कि उनके बैच में 15 स्टूडेंट थे। उनके बैच में कोई लड़की नहीं थी। अब पीयू का ढांचा बदल गया है, लेकिन विभाग वैसा ही है।
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वे पंजाब के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर के पद से रिटायर हुए हैं। करीब 20 साल बाद विभाग में लौटे 76 वर्षीय एसपीएस भाटिया असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर कम स्टेट ड्र्ग्स कंट्रोलर के पद से रियाटर हुए हैं। उन्होंने भी 1963 में ही एम फार्मेसी की डिग्री हासिल की थी।
डायमंड ईयर से नहीं पहुंचा कोई
एलुमनी इवेंट की कॉर्डिनेटर प्रो. रंजू बंसल ने बताया कि 53 बैच के स्टूडेंट उम्र दराज होने और मौसम खराब होने के कारण कोई नहीं पहुंचे। 63 बैच से केवल भगवान सिंह और एसपीएस भाटिया ही पहुंचे। 88 बैच से धीरत कुमार, डॉ. पूनम पिपलानी, डॉ. रंजू बंसल, मीना बंसल, संजय बंसल, रचना और गजेंद्र ने शिरकत की।