निजी स्कूलों के खिलाफ उत्तराखंड में 'महाआंदोलन'
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देहरादून में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ 'महाआंदोलन' हुआ। करीब 20 संगठनों के प्रतिनिधि सड़क पर उतर आए।
मंगलवार को इस 'महाआंदोलन' के जरिए संगठनों ने विधानसभा कूच कर अभिभावकों के दर्द को अनदेखा कर रही सरकार को झकझोरने की कोशिश की। एक साथ इतने संगठनों के हल्ला बोलने का असर नजर आया। शिक्षामंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने संगठन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया और शीघ्र हल निकालने का आश्वासन दिया।
मंगलवार दोपहर 12 बजे उत्तराखंड महिला मंच, नवभारत संघ, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, अधिवक्ता संघ, अखिल गढ़वाल सभा, उत्तराखंड महिला फेडरेशन, सर्वोदय मंडल, बैंक इंप्लाइज यूनियन, राजकीय शिक्षक संघ,जन संवाद, आम आदमी पार्टी, कम्यूनिस्ट पार्टी आफ इंडिया, दिशा संगठन, रूलक, लोक चेतना मंच, चेतना आंदोलन, रोडवेज यूनियन, आरटीआई ट्रस्ट, अपने-सपने संस्था सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि एलआईसी चौक पर एकत्र हुए।
यहां से इन्होंने विधानसभा कूच किया। विधानसभा से पहले ही पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर जुलूस रोक लिया। इसके बाद संगठन प्रतिनिधियों ने काफी देर तक धरना दिया।
निजी स्कूलों की लूट समाप्त करने के शासनादेश होंगे जारी
मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में निजी स्कूलों की लूट को समाप्त करने के लिए तत्काल शासनादेश जारी करने, इसका कड़ाई से अनुपालन, इस शिक्षा सत्र में फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए शासनादेश, डोनेशन को संज्ञेय अपराध घोषित करने, अलग-अलग मदों में अभिभावकों से वसूली पर रोक लगाने की मांग की गई।
बुलाई जाएगी स्कूलों की बैठक : शिक्षामंत्री
विधानसभा में संगठनों के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के दौरान शिक्षामंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने जल्द ही सभी स्कूल प्रबंधकों की बैठक बुलाने का वादा किया। कहा कि जल्द ही समस्या का हल निकाला जाएगा।
वार्ता में कमला पंत, जगदीश कुकरेती, जगमोहन मेंदीरत्ता, प्रदीप कुकरेती, संजय भट्ट, विमला बिष्ट, ऊषा भट्ट, विजय नैथानी, हरि भंडारी व विमला बिष्ट, मनोज ध्यानी मौजूद रहे।
वार्ता के बाद महिला मंच ने कार्रवाई के लिए 24 मार्च तक का समय दिया है। कोई निर्णय न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। इसके तहत 25 मार्च को गांधी पार्क में धरना दिया जाएगा।
निजी स्कूल अत्याचार कर रहे हैं। हम महिला मंच के आंदोलन को पूरा समर्थन देते हैं और आंदोलन के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
- रामचंद्र रतूड़ी, प्रदेश मंत्री, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद
नियम हैं, पर पालन नहीं
निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए नियम तो बनाए गए हैं, लेकिन इनका पालन कागजों में ही होता है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के स्कूलों में पैरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन (पीटीए) का गठन होना अनिवार्य है।
राज्य सरकार भी एनओसी देते वक्त स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) गठन करना जरूरी बताती है। लेकिन ऐसा होता नहीं। कहीं हो भी तो महज खानापूर्ति की जाती है।
सीबीएसई ने एक साल पूर्व सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिए थे कि बेहतर शैक्षणिक सुझावों और स्कूल प्रबंधन के निर्णयों पर नजर रखने के लिए पीटीए का गठन करें। स्कूलों में पीटीए का गठन तो हुआ, लेकिन सिर्फ कागजों में। अभिभावकों की सलाह द्वितीय वरीयता पर होती है।
इसी प्रकार, निजी स्कूलों को मान्यता देने के लिए दी जाने वाली एनओसी में यह भी शर्त होती है कि हर स्कूल को एक स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) का गठन करना होगा। इसमें कम से कम 15 और अधिकतम 21 सदस्य होंगे। स्कूल का प्रिंसिपल इसका सचिव होगा। तीन सदस्य स्कूल की सोसाइटी के होंगे।
कम से कम दो शिक्षक उसी स्कूल के। दो टीचर पैरेंट्स होंगे और दो पैरेंट्स। एक केंद्र या राज्य सरकार का शिक्षा विभाग का अधिकारी भी जिसे शिक्षा विभाग नामित करेगा। दो प्राचार्य बाहर के स्कूलों के, दो शिक्षा विशेषज्ञ होंगे।
इसकी साल में कम से कम चार बैठक होनी अनिवार्य होंगी, जिसमें स्कूल में फीस बढ़ोत्तरी से लेकर तमाम मुद्दों पर फैसला लिया जाएगा। एसएमसी की पावर यहां तक है कि प्रिंसिपल के छुट्टी के आदेश भी इनकी अनुमति से ही होते हैं। लेकिन स्कूलों ने इसे खिलौना बना लिया है।
वह अपने लोगों को एसएमसी में रखकर कागजी औपचारिकताएं पूरी करते हैं। अगर शिक्षा विभाग चाहे तो एसएमसी के सदस्य और उनकी बैठकों का विवरण स्कूलों से मांग सकता है। लेकिन वह इसकी कभी जरूरत ही नहीं समझता है।
ऑल उत्तराखंड पैरेंट्स एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष नीरज सिंघल की अगुवाई में जिलाधिकारी से मिला। एसोसिएशन ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि जिला पंचायत देहरादून नगर निगम से लगी ग्राम पंचायतों में टैक्स लगाने की कोशिश कर रहा है।
इस टैक्स के दायरे में स्कूल भी आएंगे। पहले ही अभिभावक फीस बढ़ोतरी से त्रस्त हैं, टैक्स लगाने पर दिक्कत और बढ़ेगी। इस पर रोक लगाने की मांग की गई। सुदेश उनियाल, रतन सिंह चौहान, उमेश वालिया, रविंद्र वाल्मीकि, बबीता रानी, महेश पांडे, संदीप भटनागर, संदीप नौटियाल आदि मौजूद रहे।