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रिजल्ट से नाराज छात्रों का सीबीएसई दफ्तर में हंगामा

Fri, 30 May 2014 08:24 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 30 May 2014 08:24 PM IST
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Protest at cbse office dehradun

सीबीएसई 12वीं के परिणामों की खामियों से परेशान अभिभावक और छात्रों ने दूसरे दिन भी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय पर जमकर हंगामा काटा।

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उनका आरोप था कि जल्दबाजी में रिजल्ट तैयार करने के दौरान छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। वह निदेशक से मिलना चाहते थे लेकिन कर्मचारियों ने उन्हें रोक लिया।

इस वजह से उनके बीच हाथापाई और गाली गलौच भी हुई। कैंट पुलिस ने स्थिति संभाली ली। बाद में आश्वासन मिलने के बाद अभिभावक लौट गए।

कर्मचारियों के साथ हुई हाथापाई

Protest at cbse office dehradun

शुक्रवार को सुबह दस बजे भारी संख्या में अभिभावक और छात्र सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे। गेट पर नारेबाजी शुरू कर दी।

माहौल संभालने को स्टाफ सामने आया लेकिन गुस्साए लोग नहीं माने। उनकी मांग थी कि वह सीधे निदेशक से बात करना चाहते हैं।

जब उन्हें रोकने का प्रयास किया गया तो कर्मचारियों के साथ हाथापाई और गाली गलौच भी हुई। बावजूद इसके लोग निदेशक के पास पहुंचने में कामयाब रहे।

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पहुंची पुलिस फोर्स, निदेशक ने सुनी परेशानी

Protest at cbse office dehradun

उन्होंने निदेशक को अपनी समस्याएं बताई। इस बीच कैंट थानाध्यक्ष वीके जेठा भी मय फोर्स मौके पर पहुंचे। निदेशक मनोज कुमार श्रीवास्तव ने अभिभावकों की समस्याएं सुनी।

उन्होंने कहा कि अगर किसी छात्र के साथ ऐसी परेशानी हुई है तो वह इसे प्राथमिकता पर देखेंगे। उन्होंने अभिभावकों को आश्वासन दिया कि वह जल्द से जल्द रिचेकिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दें।

इसके बाद वह जल्द से जल्द रिजल्ट दे देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद बच्चे का भविष्य खराब करना नहीं है। किसी भी छात्र की हर संभव मदद की जाएगी। बाद में गुस्साए अभिभावक लौट गए।

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बोर्ड की जल्दबाजी पड़ रही भारी

Protest at cbse office dehradun

सीबीएसई ने नए क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून की स्थापना के साथ ही इसे जिम्मेदारी देने में बेहद जल्दबाजी कर दी। हालात यह हैं कि कम कर्मचारियों में करीब ढ़ाई लाख 10वीं व 12वीं के छात्र-छात्राओं की परीक्षा कराने में पसीने छूट गए। कर्मचारियों ने रात एक बजे तक भी काम किया लेकिन गलतियां सामने आनी ही थी।

सीबीएसई ने जनवरी 2014 में इलाहाबाद रीजन के दो टुकड़े कर दिए। नया रीजन देहरादून खोला गया। नए रीजन में इलाहाबाद की तुलना में स्कूलों की संख्या 200 अधिक है।

पूरे उत्तराखंड और यूपी के 19 जिलों को कवर करने वाले इस रीजन में कर्मचारियों की कमी सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी। केंद्रीय बोर्ड ने इसे दूर करने के बजाए यहां मार्च में होने वाली परीक्षा का बोझ भी लाद दिया।

दिल्ली के अधिकारी भी हैं जिम्मेदार

Protest at cbse office dehradun

जिस वक्त में क्षेत्रीय कार्यालय अपना सही पता और ठिकाना तलाश रहा था, उस वक्त में परीक्षा की जिम्मेदारी आसान चुनौती नहीं थी।

कम कर्मचारियों में हाल यह रहा कि रात को एक-एक बजे तक कर्मचारियों ने मूल्यांकन का काम निपटाया। ऐसे में गलती होनी लाजिमी थी। जबकि सीबीएसई का रिकॉर्ड खंगालें तो जब बोर्ड ने पटना रीजन बनाया था तो शुरुआती डेढ़ साल तक उसे परीक्षा और मूल्यांकन की जिम्मेदारी से दूर रखा गया था।

बाद में उसे यह जिम्मेदारी दी गई थी। जाहिर तौर पर अगर रिजल्ट में खामियां आई हैं तो इसके लिए दिल्ली में बैठे अधिकारी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।

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