'इंडस्ट्रियल ओरिएंटेड हो एजुकेशन तभी मिलेगी सक्सेस'
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इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट इंस्टीट्यूटशंस को इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम
इंडस्ट्री से आइडिया जनरेट करवाएं और फिर इंस्टीट्यूशंस उस पर रिसर्च कर सॉल्यूशन ढूंढ़ें। इससे दोनों के बीच रिश्ते अच्छे होंगे और स्टूडेंट्स के साथ फैकल्टी की पर्सनैलिटी भी डवलप होगी। स्टूडेंट्स जब पढ़ाई पूरी कर बाहर निकलेंगे तो उन्हें एक से बढ़कर एक जॉब मिलेगी।
ये
विचार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) लखनऊ के निदेशक प्रो.
देवी सिंह ने व्यक्त किए।
वे बुधवार को गौतमबुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय
द्वारा आईईटी के ऑडिटोरियम में ‘इंडस्ट्री, एकेडमिया इंटरेक्शन फॉर इनोवेशन
एंड क्वालिटी टेक्निकल एजुकेशन : ए पाथ फारवर्ड फॉर 2020’ पर आयोजित
कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।
प्रमुख सचिव
(विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) डॉ. हरसरन दास ने कहा कि जब तक अच्छे आइडिया
नहीं आएंगे, तब तक हम आगे नहीं बढ़ सकते।
इंडस्ट्री ओरिएंटेड हो पढ़ाई
प्रमुख
सचिव (प्राविधिक शिक्षा) नीरज कुमार गुप्ता ने कहा कि इंडस्ट्री ओरिएंटेड
एजुकेशन देकर हम स्टूडेंट्स की पर्सनैलिटी को बेहतर बनाएं। जीबीटीयू के
कुलपति डॉ. आरके खांडल ने कहा कि टेक्निकल एजुकेशन में अब नया ट्रेंड आ गया
है।
पहले इनपुट प्रॉसेस था जिसमें स्टूडेंट, पढ़ाई और उसके बाद डिग्री
होती थी। यानी कितनी डिग्री हमने प्रोड्यूस की उस पर जोर रहता था लेकिन अब
नए ट्रेंड में आउटकम देखा जाता है यानी जो स्टूडेंट्स पढ़कर निकल रहे हैं,
उसमें से कितने रोजगार लायक हैं।
डॉ. खांडल ने कहा कि अब हम हर तीन महीने
पर इंडस्ट्री-एकेडमिया इंटरैक्शन आयोजित करेंगे। इसके अलावा इंडस्ट्री से
एमओयू भी साइन होंगे और हम आपस में मिलकर काम करेंगे।
उन्होंने बताया कि
जीबीटीयू का 11वां दीक्षांत समारोह अगले साल चार जनवरी को आयोजित किया
जाएगा। मुख्य अतिथि के रूप में भारत में आईटी क्रांति के जनक सैम पित्रोदा
को आमंत्रित किया गया है।
माइक्रोसॉफ्ट बनाएगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
डॉ.
खांडल ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट कंपनी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड
टेक्नोलॉजी (आईईटी) में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत सेंटर बनाएगी।
इसमें
फैकल्टी और स्टूडेंट के साथ सरकारी कर्मचारियों को सॉफ्टवेयर डिजाइनिंग,
सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन, ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी। आईईटी के ऑडिटोरियम का
सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।