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स्कूलों ने गरीब बच्चों को पढ़ाने से किया इंकार
कुंदन तिवारी/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 18 Mar 2014 11:28 AM IST
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चुनावी मौसम में हर पार्टी गरीबों की पक्षधर होने का दावा कर रही है, लेकिन निजी स्कूलों ने कांग्रेस शासित हरियाणा में गरीबों के बच्चों को पढ़ाने के मामले में झटका दे दिया है।
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स्कूल संचालकों ने हरियाणा एजुकेशन एक्ट-2003 की धारा 134ए के तहत गरीब बच्चों को पढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। स्कूल संचालकों के आग्रह पर हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कान्फ्रेंस की ओर से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार के इस नियम को चुनौती दी गई है।
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कान्फ्रेंस के प्रदेशाध्यक्ष एसएस गोसाई ने अमर उजाला से कहा कि प्रदेश सरकार निजी स्कूलों को बेवकूफ बना रही है। शिक्षा के कई कानूनों का निजी स्कूलों में एक साथ पालन कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 25 फीसदी गरीब विद्यार्थियों को निजी स्कूल में दाखिला देने को कहा है। इसके एवज में केंद्र की ओर से कुल खर्च का 60 और राज्य सरकार से 40 फीसदी फंड सहयोग के रूप में स्कूलों को देने का आश्वासन दिया गया था।
गोसाई के मुताबिक, अब प्रदेश सरकार कह रही है कि वह आरटीई के नियमों का पालन सरकारी स्कूलों के माध्यम से करा लेगी। निजी स्कूल सिर्फ हरियाणा एजुकेशन एक्ट-2003 की धारा 134ए के तहत 10 फीसदी गरीब व प्रतिभावान बच्चों को दाखिला दें।
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साथ ही जिन निजी स्कूलों ने हुडा से सस्ती दर पर जमीन ली है, वे हुडा एक्ट के तहत 10 फीसदी गरीब बच्चों को दाखिला दें। यानी बिना किसी सहयोग 20 फीसदी गरीब बच्चों को निशुल्क दाखिला देना पड़ेगा।
गोसाई का कहना है कि 20 फीसदी गरीब बच्चों पर आने वाले खर्च का भार अन्य 80 फीसदी बच्चों पर कैसे डाला जा सकता है। इसी का रास्ता निकालने के लिए कोर्ट की शरण ली गई है।