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एलयू से शिक्षिका की पर्सनल फाइल गायब, एफआईआर
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 18 Jun 2014 04:42 AM IST
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एलयू में मानव शास्त्र विभाग की शिक्षिका की पर्सनल फाइल गायब करने के आरोप में रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात कर्मचारी के खिलाफ हसनगंज थाने में मंगलवार देर शाम एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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शिक्षिका ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराते हुए यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी बीते कई दिनों से उन्हें परेशान कर रहा था और जानबूझ कर ही उनकी फाइल गायब की है।
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उन्होंने यह भी कहा यह सबकुछ कर्मचारी ने अपने ही विभाग की एक शिक्षिका को गलत ढंग से लाभ पहुंचाने के लिए किया।
शिक्षिका का कहना है कि पहले इस मामले में रजिस्ट्रार कैप्टन अमिताभ प्रकाश ने ही एफआईआर करवाने के लिए कहा था।
बीती फरवरी 2014 से उन्हें इस फाइल के लिए दौड़ाया जा रहा है लेकिन उनकी फाइल नहीं मिली।
मानव शास्त्र विभाग की शिक्षिका डॉ. केया पांडेय ने मंगलवार को हसनगंज थाने में रजिस्ट्रार कार्यालय के कर्मचारी जे. कर्नाटक के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाया है।
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डॉ. पांडेय का कहना है कि 2004 में जब यूनिवर्सिटी में 52 शिक्षकों को स्थायी किया गया था तब ही उन्होंने इस मामले में अपना लिखित पक्ष रखा था कि उनके साथ ज्यादती हो गई।
उनका कहना है कि उनके ही विभाग की एक अन्य शिक्षिका ने तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया और अपने आपको हमसे सीनियर बता दिया।
इसके कारण उस शिक्षिका को ‘ए’ कैटेगरी, जबकि हमें ‘बी’ कैटेगरी में कर दिया गया।
‘ए’ वह कैटेगरी है, जिसमें पार्ट टाइम शिक्षकों को खाली पद से सापेक्ष पहले विनियमित किया गया, उसमें शामिल हों गईं।
विश्वविद्यालय को भी किया गुमराह
डॉ. केया पांडेय कहती हैं कि वर्ष 2007 में इस मामले में कार्यपरिषद ने भी जांच करने के आदेश दे दिए और मामले को रिव्यू करने को कहा।
यूनिवर्सिटी ने मामले को खींचा तो वर्ष 2012 में मामला कोर्ट में चला गया।
जुलाई 2012 में डॉ. केया पांडेय के पक्ष में फैसला आया और हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इनसे फिर से रिप्रेजेंटेशन लिया जाए और तब तक प्रोन्नति व अन्य नियुक्ति पर रोक रहेगी।
डॉ. केया पांडेय कहती हैं कि रजिस्ट्रार कार्यालय का कर्मचारी जे. कर्नाटक उन्हें लगातार परेशान कर रहा है। उसने यूनिवर्सिटी को भी गुमराह किया और इस मामले में सही जवाब न देने की कोशिश की।
इसके लिए उन्होंने तत्कालीन कुलपति प्रो. मनोज कुमार मिश्रा और बाद में जी. पटनायक दोनों के सामने मामला रखा तो जांच के आदेश हुए।
इसके बाद भी यह कर्मचारी मामले को लटकाता रहा। इसके बाद नए कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने जब जॉइन किया तो इस मामले में उन्होंने नए सिरे से लिखा पढ़ी शुरू कर दी।
इसके बाद आरोपी कर्मचारी कर्नाटक की उन्होंने कुलपति से शिकायत की कि इसने दूसरे पक्ष की शिक्षिका के पक्ष में यह लिखकर यूजीसी को भेजा कि यह जीपीएफ पाती हैं, ऐसे में उन्हें फैलोशिप मिलने लगी। इसकी भी उन्होंने शिकायत की।
गलत ढंग से फायदा पहुंचाने की कोशिश
डॉ. केया पांडेय कहती हैं कि बीती फरवरी 2014 को यूनिवर्सिटी में जब शिक्षकों के खाली पद को भरने के लिए रिव्यू कमेटी बनाई गई तो हमारे कागजात मांगे गए।
लगातार यह कर्मचारी आनाकानी करता रहा। इसके कारण उनकी फाइल कमेटी के सामने पेश नहीं हो पाई। उन्होंने अपने सभी डॉक्युमेंट की फोटो कॉपी जमा की।
इसके बाद इस कर्मचारी ने उनकी पूरी पर्सनल फाइल ही गायब कर दी है।
इनका दावा है कि इनके विभाग में दूसरी शिक्षिका जूनियर हैं और उनकी जॉइनिंग बाद में हुई है लेकिन इस कर्मचारी ने उन्हें गलत ढंग से फायदा दिलवाने के लिए मेरी पर्सनल फाइल गायब कर दी।