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निजी बीएड कॉलेजों ने नहीं करवाई वेरिफिकेशन

Fri, 23 Oct 2015 11:37 AM IST
Updated Fri, 23 Oct 2015 11:37 AM IST
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private Bed colleges verification by himachal pradesh university shimla.

एनसीटीई के नए नियमों के मुताबिक प्रदेश में बीएड कोर्स दो साल का हो गया है। कक्षाएं शुरू हुए दो माह बीत जाने के बाद भी विवि से संबद्ध निजी बीएड कॉलेजों ने मैनेजमेंट कोटे और अपने स्तर पर दिए प्रवेश की एचपीयू शिक्षा विभाग से वेरिफिकेशन नहीं करवाई है। विवि बिना वेरिफिकेशन ऐसे छात्रों के फार्म रिजेक्ट कर सकता है। छात्र परीक्षा से भी महरूम हो सकते हैं।

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30 सितंबर तक तय अंतिम तारीख तक 75 में से 30 निजी कॉलेजों ने ही वेरिफिकेशन करवाई है। 44 कॉलेजों में मैनेजमेंट और अन्य आधार पर कितने छात्रों को प्रवेश दिया है, इसका विवि के पास रिकॉर्ड नहीं है। निजी बीएड कॉलेजों में करीब आठ हजार सीटें हैं। इनमें तय न्यूनतम पात्रता शर्तें पूरा करने वालों को ही प्रवेश दिया है या नहीं, इसकी विवि को जानकारी नहीं है।
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कोर्स दो साल का होने पर विवि बीएड के ऑनलाइन फार्म में भी बदलाव करेगा। इसके लिए छात्रों की सही जानकारी जरूरी है। बीएड के दो वर्षीय कोर्स के लिए नवंबर में परीक्षा फार्म भरे जाएंगे। दिसंबर में परीक्षाएं शुरू होंगी। सरकार ने निजी बीएड कॉलेजों में हजारों सीटें खाली रहने पर प्रवेश परीक्षा में अपीयर होने वाले हर छात्र को प्रवेश देने की छूट दी थी।
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एंट्रेंस में 0-34 अंक वालों को ही प्रवेश

private Bed colleges verification by himachal pradesh university shimla.

सरकार के आदेशों पर प्रवेश परीक्षा में 0-34 फीसदी अंक लेने वाले छात्रों को निजी कॉलेज मैनेजमेंट कोटे में प्रवेश दे सकते हैं। 2010 में कोर्ट से एक बार मिली छूट के बाद से निजी कॉलेज अपनी मर्जी से स्नातक में न्यूनतम अंक की शर्त पूरी करने वाले छात्रों को भी प्रवेश देते आए। इस बार डीनसीसी की अध्यक्षता में बनी प्रवेश, काउंसलिंग कमेटी ने प्रवेश परीक्षा देने वालों को ही प्रवेश देने का नियम लागू करने का निर्णय लिया था।

अब तक 74 में से मुश्किल से तीस कॉलेजों ने प्रवेश की वेरिफिकेशन करवाई है। विवि के पास कुछ कॉलेजों और काउंसिलंग प्रक्रिया में आवंटित सीटों का ही रिकॉर्ड है। इससे किस कॉलेज में कितनों को प्रवेश दिया है, यह स्थिति साफ नहीं हो रही। इससे भविष्य में छात्रों को परीक्षा फार्म भरने और परीक्षा देने तक में मुश्किल हो सकती है।
- प्रो. सुदर्शना राणा, शिक्षा विभागाध्यक्ष

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