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गढ़वाल विवि का प्री पीएचडी एंट्रेंस अटका

Wed, 24 Feb 2016 01:25 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 24 Feb 2016 01:25 PM IST
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pre phd entrance in garhwal university.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के फैलोशिप पर रोक लगाने के बाद गढ़वाल केंद्रीय विवि का प्री पीएचडी एंट्रेंस अटक गया है।

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विवि का कहना है कि जब तक यूजीसी से जवाब नहीं आएगा, प्रवेश परीक्षा पर फैसला नहीं लिया जा सकता है। विवि के परिसर में हर साल 200 से अधिक युवा विभिन्न विषयों में पीएचडी फैलोशिप का लाभ लेते हैं।

यूजीसी ने कुछ महीने पहले पीएचडी की फैलोशिप पर देशभर के विश्वविद्यालयों में रोक लगा दी। इसके बाद से लगातार विवि यूजीसी के जवाब का इंतजार कर रहे हैं लेकिन अभी तक रास्ता साफ नहीं हुआ है। गढ़वाल विवि के ओएसडी डा. डीएस नेगी ने बताया कि यूजीसी से जवाब न आने से अभी प्री पीएचडी का एंट्रेंस रोका गया है।
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हर साल यह तय समय पर आयोजित होता था। गत वर्ष इस एंट्रेंस के 232 युवाओं का चयन हुआ था, जो कि फैलोशिप ले रहे थे। इस बार यूजीसी की रोक के बाद से उनकी फैलोशिप भी अटकी है। नई फैलोशिप भी जारी नहीं की जा सकती है। इस वजह से एंट्रेंस की प्रक्रिया अटक गई है। डा. नेगी ने बताया कि अब यूजीसी से जवाब आने पर ही आगे की प्रक्रिया होगी।
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हर महीने मिलते हैं आठ हजार रुपये
विवि परिसर से पीएचडी में एनरोलमेंट कराने के लिए अब हर साल छात्र को प्री पीएचडी की प्रवेश परीक्षा देनी होती है। इसे पास करने के बाद छात्र का पीएचडी कोर्स वर्क होता है। इसके बाद शोध शुरू होता है।


पीएचडी करने वाले युवाओं को विवि की ओर से आठ हजार रुपये प्रतिमाह फैलोशिप और दस हजार रुपये सालाना का स्टाइफंड दिया जाता है। इसका मकसद यह होता है कि छात्र बिना किसी आर्थिक व्यवधान के अपना शोध पूरा करता है।

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