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उच्च शिक्षा से दूर उत्तराखंड के अधिकतर युवा

Wed, 05 Nov 2014 10:42 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 05 Nov 2014 10:42 AM IST
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poor higher education in uttarakhand.

उत्तराखंड में 21 सरकारी और गैर सरकारी विवि हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत देहरादून के आसपास हैं। इन विवि में साढ़े तीन लाख छात्र पढ़ रहे हैं।

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मुक्त विवि का दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार
जबकि उत्तराखंड में 18 से 23 साल की उम्र के साढ़े 12 लाख युवा हैं। शेष युवाओं को पढ़ने का मौका क्यों नहीं मिल पा रहा है। उच्च शिक्षा पर चिंतन के साथ उत्तराखंड मुक्त विवि का दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुरू हुआ।
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मंगलवार को दून विवि के सभागार में सेमिनार का शुभारंभ संसदीय सचिव प्रो. जीतराम, दून विवि के कुलपति प्रो. वीके जैन और मुक्त विवि के कुलपति प्रो. सुभाष धूलिया ने किया।
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‘उत्तराखंड में उच्च शिक्षा: वर्तमान-भविष्य एवं दूरस्थ शिक्षा’ पर बोलते हुए संसदीय सचिव (उच्च शिक्षा) प्रो. जीतराम ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सरकारी तंत्र और ब्यूरोक्रेसी की तत्परता जरूरी है। शिक्षा पॉलिसी को लागू करने के प्रति गंभीरता भी दिखानी होगी।

प्रमुख वक्ता इग्नू के डॉ. पंकज खरे ने उच्च शिक्षा में बदलावों पर जोर दिया। प्रो. एएन पुरोहित ने कहा कि उच्च शिक्षा के नाम पर बेरोजगारों की फौज खड़ा कर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता।


यूओयू के प्रो. गिरजा पांडे ने कहा कि उत्तराखंड में क्षेत्रीय असंतुलन, कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, तकनीकों का अभाव शिक्षा में दोष के कारण हैं।

दूरस्थ शिक्षा महत्ता को नहीं नकार सकते
विवि के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राकेश रयाल कहा कि उच्च शिक्षा में दूरस्थ शिक्षा महत्ता को नकारा नहीं जा सकता है। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता यूकॉस्ट के महानिदेशक राजेंद्र डोभाल ने की।

इसमें प्रो. बीके जोशी व प्रो. सत्यकाम ने दूरस्थ शिक्षा के प्रति पैदा हुई भ्रांतियां दूर करने पर जोर दिया। इस मौके पर डॉ. बीएम हरबोला, डॉ. संदीप नेगी, डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल, प्रो. दुर्गेश पंत, प्रदीप पाठक आदि मौजूद रहे।

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