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पॉलीटेक्निक छात्रों के लिए नहीं सूचना का अधिकार!
आशीष त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Tue, 01 Oct 2013 02:26 AM IST
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हीवेट पॉलीटेक्निक के छात्र राकेश कुमार (रोल नंबर: 2233283040) ने 2012 में अंतिम वर्ष की परीक्षा दी थी। एक सब्जेक्ट में वह नौ नंबर से फेल हो गया था।
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मूल्यांकन में गड़बड़ी की आशंका के चलते राकेश ने आरटीआई के तहत कॉपी दिखाने की मांग की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आखिर में राकेश इस विषय की परीक्षा में दोबारा शामिल हुए।
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प्रसाद पॉलीटेक्निक के फर्स्ट ईयर का छात्र रवि प्रकाश (रोल नंबर-2413411073) 2012 की वार्षिक परीक्षाओं में शामिल हुआ था। आठ नंबरों से फेल होने के कारण रवि ने अपनी उत्तरपुस्तिकाएं देखने के लिए आरटीआई लगाई।
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उसका भी कोई जवाब न मिलने के चलते अवसाद से घिरे रवि प्रकाश ने पॉलीटेक्निक की पढ़ाई छोड़ने का फैसला कर लिया। फिलहाल, वह कानपुर में कोचिंग कर रहा है।
ये दोनों मामले तो बस बानगी भर हैं। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार भले ही कितने दावे क्यों न करें, लेकिन प्राविधिक शिक्षा विभाग छात्रों को सूचना का अधिकार तक नहीं देता है।
आलम ये है कि वार्षिक परीक्षाओं की कॉपी दिखाए जाने की मांग को लेकर बीते वर्ष सैकड़ों छात्रों की ओर से आरटीआई का इस्तेमाल किया गया।
कॉपी दिखाना तो दूर की बात, प्राविधिक शिक्षा परिषद के जिम्मेदार समय पर उत्तरपुस्तिकाओं का पुन: मूल्यांकन कराने के लिए भी तैयार नहीं है।
सूचना का अधिकार के तहत अपनी वार्षिक परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाएं देखना छात्रों का हक है। आरटीआई कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा ने बताया कि आरटीआई अधिनियम की धारा (6) में आम आदमी को सूचना मांगने काअधिकार मिला है।
इसी कानून के सेक्शन 2(जे) में दस्तावेजों के निरीक्षण का भी अधिकार प्राप्त है। इसका इस्तेमाल कर छात्र एक परीक्षक की मौजूदगी में छात्र कॉपी देख सकते हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय, गौतमबुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय समेत सभी विवि, कॉलेज इसके दायरे में हैं। फिर, प्राविधिक शिक्षा परिषद कैसे बाहर हो सकता है?
उधर, इस वर्ष भी भारी संख्या में फर्स्ट ईयर के छात्रों को फेल किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। डिप्लोमा इंजीनियर्स स्टूडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से सोमवार को पोस्ट कार्ड अभियान की शुरुआत की गई।
संगठन की ओर से आरटीआई के तहत कॉपी दिखाए जाने, कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन किए जाने और सचिव प्राविधिक शिक्षा परिषद को हटाने की मांग की है।
अंक पत्र में गलती, सुनने के लिए तैयार नहीं
प्राविधिक शिक्षा परिषद के जिम्मेदार अपनी गलतियों को सुनने के लिए भी तैयार नहीं है। आलम ये है कि इस वर्ष लखनऊ पॉलीटेक्निक से फाइनल ईयर की परीक्षा देने वाले छात्र अभिमन्यु पाल के अंक पत्र में कई गड़बड़ियां हैं।
प्रोजेक्ट वर्क में 82 के स्थान पर 32 अंक जोड़ दिए गए हैं। इतना ही नहीं, एप्लाइड मैकेनिक्स की परीक्षा देने के बाद भी उसे अनुपस्थित दिखाया गया है।
कैरी ओवर सेकंड ईयर में 498 के स्थान पर 496 अंक दिए गए हैं। छात्र की ओर से सचिव कार्यालय में कई बार शिकायत की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अंत में छात्र ने प्राविधिक शिक्षा मंत्री से नतीजों में सुधार की गुहार लगाई है।