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अब आंख और चेहरे की हरकतें खोल देंगी पोल
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 28 Jan 2014 12:55 PM IST
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अब आंख और चेहरे की हरकतें आसानी से किसी भी व्यक्ति का राज खोल देंगी। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है, जो व्यक्ति के चेहरे और आंख की भावभंगिमा को कैप्चर कर लेगा और तत्काल एनालिसिस कर परिणाम सामने ला देगा। इससे आसानी से पता चल जाएगा कि व्यक्ति झूठ बोल रहा है कि सच।
यह सॉफ्टवेयर यहां तक बताने में सक्षम होगा कि उस समय व्यक्ति के दिमाग में क्या चल रहा है। यानी वह दुखी है, गुस्से में है तो सॉफ्टवेयर तुरंत बता देगा।
पंजाब यूनिवर्सिटी पहुंचे डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल डा. वीजी शेखरन ने बताया कि संस्थान की ओर से इस सॉफ्टवेयर पर तेजी से काम किया जा रहा है। जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा।
डीआरडीओ के मुताबिक सॉफ्टवेयर में चेहरों के 500 से अधिक एक्सप्रेशन और आंखों की पुतली की अलग-अलग इमेज होंगी। यह इमेज सात अलग-अलग कैटेगरी में होंगी।
इनमें प्रमुख रूप से खुश, दुख, डर, गुस्सा, चिढ़ना आदि शामिल होंगी। यह सॉफ्टवेयर हिडन कैमरे में भी इंस्टॉल किया जा सकता है। सामने वाले व्यक्ति को पता ही नहीं चल पाएगा कि उसके एक्सप्रेशन को रिकार्ड किया जा रहा है।
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सुपरसोनिक मिसाइल का एयर वर्जन जल्द :
शेखरन ने अपने प्रेजेंटेशन में बताया कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एडवांस वर्जन का पिछले साल सफल परीक्षण किया गया है।
उन्होंने खुलासा किया कि सुपरसोनिक मिसाइल का हवा और पानी का वर्जन विकसित करने की प्रक्रिया पाइपलाइन में है। यह देश के लिए बहुत ही बड़ी उपलब्धि होगी। इसके अलावा डीआरडीओ हाइपरसोनिक मिसाइल पर भी काम कर रहा है।
यह तकनीक सिर्फ चुनिंदा देशों के पास ही उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि अगले 10 सालों में डीआरडीओ भारतीय सेना को कई एक्सक्लूसिव और अत्याधुनिक हथियार देगा जो विश्व के लिए एक चुनौती होगी।
पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट से ज्यादा फायदेमंद :
भारत की जांच एजेंसियों के पास किसी अपराधी का झूठ और सच पकड़ने के लिए पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की सुविधा है। हालंकि यह ज्यादा कारगर नहीं है। एक तो इसका रिजल्ट काफी देरी से मिलता है और दूसरा टेस्ट करने से पहले कानूनी अड़चनों से गुजरना पड़ता है।
यदि आरोपी ने मना कर दिया तो जांच एजेंसियां उसका टेस्ट नहीं ले सकती। ऐसे में यह सॉफ्टवेयर काफी कारगर साबित होगा और आसानी से सामने वाले का एक्सप्रेशन पता चल जाएगा।
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यह सॉफ्टवेयर यहां तक बताने में सक्षम होगा कि उस समय व्यक्ति के दिमाग में क्या चल रहा है। यानी वह दुखी है, गुस्से में है तो सॉफ्टवेयर तुरंत बता देगा।
पंजाब यूनिवर्सिटी पहुंचे डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल डा. वीजी शेखरन ने बताया कि संस्थान की ओर से इस सॉफ्टवेयर पर तेजी से काम किया जा रहा है। जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा।
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डीआरडीओ के मुताबिक सॉफ्टवेयर में चेहरों के 500 से अधिक एक्सप्रेशन और आंखों की पुतली की अलग-अलग इमेज होंगी। यह इमेज सात अलग-अलग कैटेगरी में होंगी।
इनमें प्रमुख रूप से खुश, दुख, डर, गुस्सा, चिढ़ना आदि शामिल होंगी। यह सॉफ्टवेयर हिडन कैमरे में भी इंस्टॉल किया जा सकता है। सामने वाले व्यक्ति को पता ही नहीं चल पाएगा कि उसके एक्सप्रेशन को रिकार्ड किया जा रहा है।
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सुपरसोनिक मिसाइल का एयर वर्जन जल्द :
शेखरन ने अपने प्रेजेंटेशन में बताया कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एडवांस वर्जन का पिछले साल सफल परीक्षण किया गया है।
उन्होंने खुलासा किया कि सुपरसोनिक मिसाइल का हवा और पानी का वर्जन विकसित करने की प्रक्रिया पाइपलाइन में है। यह देश के लिए बहुत ही बड़ी उपलब्धि होगी। इसके अलावा डीआरडीओ हाइपरसोनिक मिसाइल पर भी काम कर रहा है।
यह तकनीक सिर्फ चुनिंदा देशों के पास ही उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि अगले 10 सालों में डीआरडीओ भारतीय सेना को कई एक्सक्लूसिव और अत्याधुनिक हथियार देगा जो विश्व के लिए एक चुनौती होगी।
पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट से ज्यादा फायदेमंद :
भारत की जांच एजेंसियों के पास किसी अपराधी का झूठ और सच पकड़ने के लिए पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट की सुविधा है। हालंकि यह ज्यादा कारगर नहीं है। एक तो इसका रिजल्ट काफी देरी से मिलता है और दूसरा टेस्ट करने से पहले कानूनी अड़चनों से गुजरना पड़ता है।
यदि आरोपी ने मना कर दिया तो जांच एजेंसियां उसका टेस्ट नहीं ले सकती। ऐसे में यह सॉफ्टवेयर काफी कारगर साबित होगा और आसानी से सामने वाले का एक्सप्रेशन पता चल जाएगा।