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नेशनल चैंपियनशिप के खिलाड़ियों को लावारिस छोड़ा

Sun, 05 Jan 2014 12:07 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 05 Jan 2014 12:07 PM IST
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players left alone

राजधानी देहरादून में राष्ट्रीय विद्यालयी एथलेटिक्स प्रतियोगिता के लिए चुने गए खिलाड़ियों का साथ ऐसा सुलूक हुआ, जिसके बारे में आपने सोचा भी न होगा।

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इनका हाल बुरा

प्रिंस चौक के पास वर्णी जैन इंटर कॉलेज के एक कमरे में टेबल जोड़कर उसी पर विस्तर लगाकर छह से अधिक बच्चे लेटे हुए थे। दूसरे कमरे में 10 से अधिक बच्चे फर्श पर दरी बिछाकर लेटे थे। किसी के पास रजाई है तो किसी के पास कंबल।
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एक-एक बिस्तर में दो-दो बच्चे ठंड की रात गुजारने का प्रयास करते दिखे। ऐसा ही हाल अन्य कमरों का भी है। यहां पर करीब 50 बच्चे ठहरे हैं जो प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए हैं। इन्हें बुलाया गया तो कैंप के लिए है लेकिन इन्हें न तो कोच का पता है न ही मैदान का। न जाने का पता और न आने का...।

यह हाल है राष्ट्रीय विद्यालयी एथलेटिक्स प्रतियोगिता के लिए चुनी गई राज्य की टीम के खिलाड़ियों का। कैंप में अभ्यास के नाम पर इन्हें दून बुला तो लिया गया लेकिन रहने-खाने और सोने की उचित व्यवस्था नहीं की गई।

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भविष्य के चैंपियनों को जनवरी की सर्द रात में उनके हाल पर छोड़ दिया गया। न तो किसी के पास रजाई है न ही कंबल। एक-एक बिस्तर में तीन-तीन खिलाड़ी रात बिताने के लिए मजबूर हैं। बिछाने के नाम पर कइयों के पास केवल दरी है।

मैनेजर और कोचों ने भी छोड़ा
ऐसे में वह रात भर सो नहीं पाते हैं। राष्ट्रीय विद्यालयी एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए राज्य की टीम तो शिक्षा विभाग ने चुन ली, लेकिन उनकी सुध लेना अधिकारियों ने उचित नहीं समझा। टीम के साथ जाने वाले मैनेजर और कोचों ने भी खिलाड़ियों को लावारिस हालत में छोड़ दिया।

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बीते चार दिन से खिलाड़ी अपने कोच से भी नहीं मिल सके हैं। रांची में 8 से 12 जनवरी तक होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए 5 जनवरी की शाम 100 से अधिक सदस्यी बालक-बालिका वाली उत्तराखंड की टीम रवाना होनी है। जाने से पहले टीम के खिलाड़ियों को एक दिन भी अभ्यास का मौका नहीं मिला है।


बताया जा रहा है कि प्रतियोगिता के लिए 28 दिसंबर से देहरादून में कैंप लगाया जाना था, लेकिन खिलाड़ियों को समय पर सूचना नहीं दी गई। जानकारी मिलने के बाद कुछ जिलों से 1 जनवरी तो कुछ से 2 जनवरी को खिलाड़ी दून पहुंचे।

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लेकिन यहां न तो इनसे कोच मिलने आए न ही अभ्यास के लिए कहीं ले जाया गया। विकासनगर, चकराता से भी दो दिन पहले खिलाड़ियों को बुला लिया गया। खिलाड़ियों का कहना है कि पांच-छह टीचर आते हैं जो फार्म भरकर चले जाते हैं।

खाना सिर्फ दाल-चावल
राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। शुरू के दिन अपने खर्च पर होटल में खाना खाने वाले खिलाड़ियों को दूसरे दिन से खाना तो मिला, लेकिन फटकार के साथ।

स्कूल में ठहरे खिलाड़ियों ने बताया कि दिन हो या रात दोनों टाइम सिर्फ दाल-चावल दिया जा रहा है। रोटी मांगते हैं तो नहीं मिल रही, जिद करने पर जली रोटी दे रहे हैं।

पिथौरागढ़ को छूट कैसी
राज्य टीम में शामिल खिलाड़ियों ने पिथौरागढ़ की टीम को छूट मिलने पर भी सवाल खड़ा किया है। खिलाड़ियों ने बताया कि टीम में शामिल हॉस्टल के खिलाड़ियों को उनके कोच रोज अभ्यास के लिए ले जा रहे हैं, लेकिन उनको पूछा तक नहीं जा रहा।

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