प्ले ग्रुप में एडमिशन के लिए ब्लड सैंपल जरूरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरटीई लागू होने के बावजूद राजधानी देहरादून के कई स्कूल जहां खुल्लम खुल्ला बच्चों की प्रवेश परीक्षा ले रहे हैं, वहीं प्ले ग्रुप में दाखिले के लिए भी लूट मची है।
अभिभावकों की जेब में डाका डाला जा रहा है। प्ले ग्रुप के लिए 10-16 हजार रुपए तक फीस वसूली जा रही है।
इतना ही नहीं, बेसिक सुविधाएं देना तो दूर कुछ ने अब मासूमों के मेडिकल और ब्लड ग्रुप रिपोर्ट मांगना शुरू कर दिया है।
लोग इसे वसूली का नया फंडा मान रहे हैं। उनके मुताबिक लैब संचालकों और डॉक्टरों से सांठगाठ कर स्कूल पैसा बनाने में जुटे हैं।
स्कूलों की मनमानी
राजधानी में पब्लिक स्कूलों की जमकर मनमानी चल रही है। स्कूल संचालकों में न शासन-प्रशासन का डर है, न शिक्षा विभाग की कोई परवाह।
हाल यह है कि आरटीई के तहत कई बार नोटिस के बावजूद उनकी मनमानी रुक नहीं रही। दाखिले के लिए नन्हें बच्चों की परीक्षा ली जा रही है और ढाई से तीन साल के मासूमों की ब्लड ग्रुप रिपोर्ट मांगी जा रही है।
अभिभावक भी खुलकर इसकी शिकायत के बजाए मेडिकल और ब्लड ग्रुप रिपोर्ट जुटाने में अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।
इन पर नहीं लग पा रही रोक
1-स्कूलों में दाखिले के दौरान बच्चों और अभिभावकों की परीक्षा
2-स्कूल ड्रेस और किताबों का स्कूल परिसर से वितरण
3-मनमानी फीस वृद्धि, तरह-तरह के फंड के नाम पर वसूली
4-एक से आठवीं तक के बच्चों को किया जा रहा फेल
5-मासूमों की मेडिकल और ब्लड ग्रुप रिपोर्ट मांग रहे स्कूल
ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा विभाग
पब्लिक स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग सिर्फ नोटिस जारी करने तक सीमित रह जाता है। किसी भी स्कूल के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। कुछ की मान्यता खत्म कर दी जाए तो इस मनमानी पर नकेल कसी जा सकती है।
पब्लिक स्कूलों के खिलाफ 25 शिकायतें आई हैं। यह शिकायतें फीस, किताब और ड्रेस को लेकर थी, इसे निस्तारित कर दिया गया है। बच्चों का ब्लड टेस्ट स्कूलों द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से कराया जा रहा है।
-तृप्ता शर्मा, जिला समन्वयक आरटीई