NCC कैडेट बनने के लिए जरूरी होगा ये टेस्ट
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स्कूल और कालेज स्तर पर नेशनल कैडेट कोर्पस (एनसीसी) ज्वाइन करने को लेकर ट्राइसिटी युवाओं के बीच काफी क्रेज बढ़ रहा है। शहर के शैक्षणिक संस्थानों में एनसीसी की सीमित सीटें होने के कारण नए सत्र से एनसीसी कैडेट बनने के लिए युवाओं की अब कड़े एप्टीट्यूट और फिजिकल टेस्ट से गुजरना होगा।
यूनिवर्सिटी स्तर पर भी दाखिले में युवाओं को एनसीसी सर्टिफिकेट को वेटेज मिलती है। इस कारण भी युवा एनसीसी ज्वाइन कर रहे हैं। आर्मी ज्वाइन करने के लिए एनसीसी कैडेट को एंट्री लेवल पर प्राथमिकता मिलती है।
बढ़ाई जाएंगी एनसीसी की सीटें
जानकारी अनुसार पीयू में सी सर्टिफिकेट पाने पर दाखिले में 3 फीसदी तक वेटेज मिलती है। एनसीसी कैडेट की स्कूल में 11वीं स्तर पर इनरोलमेंट की जाती है। यह प्रक्रिया आजकल स्कूलों में शुरू हो चुकी है।
कालेज और यूनिवर्सिटी में जुलाई अंत से एनसीसी की नई एनरोलमेंट शुरू होगी। जानकारी शहर के 46 शैक्षणिक संस्थानों में अभी सीनियर विंग में 2500 और जूनियर विंग में 2900 जूनियर विंग एनसीसी कैडेट रजिस्टर्ड हैं।
युवाओं के क्रेज को देखते हुए एनसीसी अधिकारियों ने 1000 नई सीट बढ़ाने का प्रपोजल तैयार किया है।
तीन साल में सी सर्टिफिकेट
स्कूल लेवल पर 11वीं और 12वीं में रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। कालेज स्तर पर तीनों साल एनसीसी ज्वाइन करनी पड़ती है। स्कूल स्तर पर ए सर्टिफिकेट जबकि कालेज लेवल पर बी और सी सर्टिफिकेट मिलता है।
एनसीसी कैडेट को साल में एनुअल ट्रेनिंग कैंप(एटीसी) के अलावा कई अन्य ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेना अनिवार्य है। दिल्ली में होने वाली गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस परेड के लिए भी 2-3 कैडेट का चुनाव होता है।
सी सर्टिफिकेट पाने पर यूनिवर्सिटी में 3 फीसदी अंकों का दाखिले में वेटेज मिलता है। एनसीसी अधिकारियों ने बताया कि कारगिल जंग के हीरो और परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम सिंह बत्रा भी कालेज समय में एनसीसी कैडेट रहे थे।
पिछले कुछ सालों में बड़ी कैडेट्स की संख्या
पिछले कुछ सालों में सी सर्टिफिकेट पाने वाले कैडेट की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2013 सत्र में 476, 2012 में 424,2011 में 342,2010 में 188 और 2009 में 318 एनसीसी कैडेट को सी सर्टिफिकेट मिल चुका है।
डीएवी-10 कालेज के स्टूडेंट मोहित ने कहा कि एनसीसी से उन्हें सीधे ही एसएसबी में जाने का मौका मिला। सी सर्टिफिकेट वालों को एससीबी में 2 से 3 चांस मिलते हैं।
कैडेट बनने में लड़कियां भी पीछे नहीं
एनसीसी कैडेट बनने में लड़कियां भी पीछे नहीं हैं। स्कूल ही नहीं कालेज स्तर पर गर्ल्स एनसीसी विंग स्थापित हो चुकी हैं। जीसीजी-11 और जीसीजी-42 में करीब 100 कैडेट एनसीसी से जुड़ी हैं।
जीसी-11 के एएनओ डा.परमजीत सिंह ने बताया कि बीए ही नहीं एमए और एमएससी कोर्स करने वाली लड़कियों भी एनसीसी में इनरोलमेंट करवाती हैं। लड़कियों के लिए अलग विंग का प्रावधान है। लड़कियों को भी एप्टीट्यूट टेस्ट और फिजिकल टेस्ट से गुजरना पड़ता है।
ये कहते हैं अधिकारी
आर्मी में जाने के इच्छुक युवाओं के लिए एनसीसी बेहतरीन गेटवे है। पिछले कुछ सालों से एनसीसी ज्वाइन करने को लेकर युवाओं में जबर्दस्त क्रेज है। सीटों के मुकाबले कई गुणा अधिक आवेदन आने पर चुनाव करना मुश्किल हो जाता है। कालेज स्तर परलड़कियां भी एनसीसी में एंट्री को प्राथमिकता दे रही हैं।
डा.परमजीत सिंह(एसोसिएट एनसीसी ऑफिसर जीसी-11)
एनसीसी की ट्रेनिंग युवाओं को न सिर्फ आर्मी बल्कि हर फिल्ड के लिए ऑलराउंडर बनाती है। सीमित सीटों के मुकाबले कई गुणा आवेदन आने लगे हैं। हमने एनसीसी कैडेट को निखारने के लिए कई नए प्रयोग किरने का प्रपोजल बनाया है। एप्टीट्यूट टेस्ट से एनसीसी के प्रति लगाव रखने वाले युवाओं का ही चयन होगा।
ब्रिगेडिटर जेएस अरोड़ा ( ग्रुप कमांडर एनसीसी ग्रुप चंडीगढ़)