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पीएचडी मिलने में अब नहीं होगी देर
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 14 May 2014 03:02 AM IST
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एलयू में अब स्टूडेंट्स को पीएचडी अवार्ड होने में लंबा इंतजार नहीं करना होगा।
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लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन नए शैक्षिक सत्र से यह व्यवस्था लागू करने जा रहा है कि स्टूडेंट के थीसिस जमा करने के अधिकतम चार महीने के भीतर पीएचडी मिल जाएगी।।
एक्सपर्ट से थीसिस की जांच और इंटरव्यू की प्रक्रिया को इस समयावधि में पूरा करना होगा।
अभी एलयू में रिसर्च स्कॉलर अपनी पीएचडी थीसिस जमा करने के एक या दो-दो साल तक चक्कर काटते रहते हैं कि उनकी पीएचडी अवार्ड हो जाए।
अब इसके लिए एक समयबद्घ व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। वहीं अब जूनियर रिसर्च फैलोशिप (जेआरएफ) व सीनियर रिसर्च फैलोशिप (एसआरएफ) को मानदेय के लिए भी चक्कर नहीं काटना होगा।
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इसके लिए एक निश्चित व्यवस्था बनायी जा रही है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसबी निमसे का कहना है कि पीएचडी के नए आर्डिनेंस में यह नियम बनाया गया है कि थीसिस जमा करने के चार महीने के भीतर स्टूडेंट्स की पीएचडी अवार्ड करवायी जाएगी।
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डॉ. निमसे कहते हैं कि स्टूडेंट्स को अब पीएचडी सेक्शन के बार-बार चक्कर नहीं लगाने होंगे।
उन्हें अपनी थीसिस समविट करनी होगी और इसके बाद निर्धारित समय सीमा में स्टूडेंट की थीसिस एक्सपर्ट से चेक करवायी जाएगी व उसका साक्षात्कार करवाया जाएगा।
इसके अलावा लखनऊ विश्वविद्यालय में अभी जेआरएफ और एसआरएफ के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से मिलने वाले मानदेय के लिए भी कार्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे।
जेआरएफ व एसआरएफ पास स्टूडेंट जो लखनऊ विश्वविद्यालय में रिसर्च कर रहे हैं वह एक निर्धारित प्रोफॉर्मा को भरेंगे और इसके बाद उसे विभागाध्यक्ष से हस्ताक्षर करवाकर आगे की प्रक्रिया को पूरा करेंगे।
हम इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाएंगे कि रिसर्च स्कॉलर को हर महीने एक निश्चित तारीख को उनका मानदेय मिल जाए।
कब किस कार्यालय से उनके मानदेय के लिए औपचारिकता पूरी होगी इस सबकुछ निर्धारित समय पर होगा। अगर इसमें कहीं कोई लापरवाही हुई तो विश्वविद्यालय प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा।