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पीएचडी वालों को इंतजार में भी ‘पीएचडी’
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 23 Feb 2015 12:24 PM IST
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अगर आप गढ़वाल केंद्रीय विवि से पीएचडी करने की सोच रहे हैं तो जरा गौर कर लें। यहां आपको अपने विषय की पीएचडी से पहले ‘इंतजार’ में पीएचडी करनी होगी।
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जी हां, यह कोई नया विषय नहीं बल्कि गढ़वाल विवि का लचर रवैया है। तीन साल पहले थिसिस जमा करने वाले युवाओं को विवि इंटरव्यू नहीं करवा पा रहा है। इससे उनका सपना अधूरा है और भविष्य भी कई साल पीछे खिसक गया है।
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रुड़की निवासी एक छात्र विवेक ने वर्ष 2008 में गढ़वाल विवि से इतिहास में पीएचडी करने के लिए पंजीकरण कराया। कड़ी मेहनत के बाद नवंबर 2011 में थिसिस भी जमा कर दी। तब से आज तक विवेक आगे की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
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दरअसल, विवि ने जो तीन थिसिस की कॉपी ली थी, उनमें अभी तक केवल एक चेक हो पाई है। दो को सहमति नहीं मिली है। ऐसे में विवेक का साक्षात्कार अटका है। विवेक जैसे तमाम छात्र हैं, जो पीएचडी पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। एक अन्य छात्र अरुण ने वाणिज्य में पीएचडी के लिए पंजीकरण कराया था।
दो साल पहले थिसिस जमा करने के बावजूद साक्षात्कार नहीं हो सका है। हालांकि गढ़वाल विवि का कहना है कि कुछ विषयों में शिक्षक नहीं मिलने से परेशानी है। बाकी सभी विषयों में आसानी से पीएचडी पूरी हो जाती है।
यह है पीएचडी की प्रक्रिया
गढ़वाल विवि में पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को कम से कम तीन वर्ष में अपनी थिसिस जमा करनी होती है। इसके बाद थिसिस की तीन कॉपी अलग-अलग प्रोफेसर के पास जाती है।
वह जांच करने के बाद रिपोर्ट भेजते हैं। इस आधार पर विवि से साक्षात्कार लेने के लिए एक प्रोफेसर नियुक्त किया जाता है। साक्षात्कार पूरा होने के बाद विवि छात्र को पीएचडी की डिग्री देती है।