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स्कूलों का ‘अत्याचार’ रोकने को अभिभावक तैयार

Thu, 16 Apr 2015 10:59 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 16 Apr 2015 10:59 AM IST
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parents protest against private school.

अभिभावकों के आग्रह और विरोध के बावजूद देहरादून के निजी स्कूलों की मनमानी कम होती नहीं दिख रही।

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हद तो यह है कि शिक्षा के मंदिरों में बैठे ‘धंधेबाजों’ को शायद किसी की कोई परवाह नहीं, ऐसा न होता तो निजी स्कूल किसी के बच्चे को स्कूल से बाहर निकालने की धमकी न देते और न ही किसी के अभिभावक को बेइज्जत किया जाता।

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले यह साबित कर रहे हैं कि निजी स्कूल अत्याचार की हदें पार कर रहे हैं...फिलहाल राहत इस बात की है कि इस बार अभिभावक भी हार मानने को तैयार नहीं हैं, इसलिए तो कुछ जगह अभिभावकों ने स्कूल के सामने धरना तक देने की चेतावनी दे डाली है।
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अगर एजूकेशनल अत्याचार के खिलाफ आंदोलन को इसी तरह धार मिलते रहे तो उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में शायद ही कोई अभिभावक इस पीड़ा को सहे....

शुल्क न देने पर वार्षिकोत्सव बंद करने की धमकी
द इंडियन एकेडमी की पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरिफ खान के नेतृत्व में भारी संख्या में अभिभावक बुधवार को फिर स्कूल पहुंचे। स्कूल प्रबंधक से वार्षिकोत्सव शुल्क के नाम पर 1150 रुपए प्रति छात्र न लिए जाने की मांग की।
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इस पर स्कूल प्रबंधन ने कहा कि जो अभिभावक यह शुल्क नहीं देना चाहते हैं, वह एक कागज पर लिखकर अपने हस्ताक्षर करके प्रबंधन को सौंप दें। साथ ही कहा कि अगर वार्षिकोत्सव का शुल्क न दिया तो यह सालाना समारोह बंद कर दिया जाएगा।

हालांकि, एक राहत भरी बात यह रही कि पीटीए गठन के मामले में स्कूल प्रबंधन ने सरकार के नियमों के हिसाब से आगामी तीन माह में पीटीए का गठन करने का आश्वासन दिया। अध्यक्ष आरिफ खान का कहना है कि मसले पर एक बैठक बुलाकर सभी अभिभावकों की राय जानी जाएगी, जिसके आधार पर आंदोलन की आगामी रणनीति बनाई जाएगी।

इस मौके पर उपाध्यक्ष सुभाष सक्सेना, महासचिव नवीन लिंगवाल, सचिव सुमीर थापा, सहसचिव सुजीत थापा, मधु, दीपमाला नौटियाल, हिमानी नेगी, माधुरी त्रिपाठी आदि अभिभावक मौजूद रहे।

ज्ञापन देने गए अभिभावकों को मिली धमकी
एसजीआरआर वसंत विहार पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष कविता वर्मा के नेतृत्व में भारी संख्या में अभिभावक एसजीआरआर स्कूल वसंत विहार पहुंचे। यहां प्रिंसिपल को ज्ञापन देने गए। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि मौके पर मौजूद एसजीआरआर ट्रस्ट से जुड़े गंभीर सिंह राणा ने उनके साथ बदतमीजी करने के साथ ही बच्चों को स्कूल से बाहर निकालने की धमकी दी।

इससे अभिभावक बहुत आहत हैं और अब इसकी लिखित शिकायत एसजीआरआर एजूकेशन मिशन के चेयरमैन महंत देवेंद्र दास को करने की रणनीति बना रहे हैं।

उन्होंने स्कूल प्रशासन से मांग की है कि शुल्क वृद्धि तत्काल खत्म की जाए, मासिक शुल्क में कमी की जाए, पीटीए का गठन किया जाए और छुट्टी की सूचना एसएमएस या फोन से करने की सुविधा शुरू की जाए। इस मौके पर महासचिव चंद्रवती, उपाध्यक्ष सरिता कुकरेती, पुष्पा पाल, बबीता देवी, हेमचंद्र, कुसुम वर्मा, लीला देवी, बाला देवी आदि मौजूद रहे।

खुलेआम ले रहे किताबों का पैसा
एक ओर निजी स्कूलों की मनमानी अपनी सेटिंग वाले बुक स्टोर से किताबें खरीदने में चल रही है। कई स्कूलों के परिसर में किताबों की दुकानें चल रही हैं तो दूसरी ओर एक स्कूल ऐसा भी है जो खुलेआम अभिभावकों से किताबों के नाम पर वसूली कर रहा है। हद तो यह है कि स्कूल ने अपनी फीस रसीद में ही किताबों की इस रकम का पूरा जिक्र भी किया है।

रायवाला स्थित मां आनंदमयी स्कूल इन दिनों पैरेंट्स एसोसिएशन के आंदोलन के चलते सुर्खियों में है। हाल ये है कि दाखिला लेने वाले हर छात्र को स्कूल प्रबंधन किताबें भी खुद ही बेच रहा है। स्कूल ने सालाना शुल्क में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। यहां बच्चे को दाखिला दिलाने वाले अभिभावक अब खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं।

ऐसे में अभिभावकों ने एसोसिएशन बनाकर लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। एक सातवीं कक्षा के छात्र से किताबों के लिए 4606 रुपये की रसीद कटाई गई और स्कूल की ओर से ही किताबों का सेट उपलब्ध करा दिया गया।


स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश जुगलान का कहना है कि स्कूल की इस मनमानी के खिलाफ सभी अभिभावक एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। दूसरी ओर, ऑल उत्तराखंड पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज सिंघल का कहना है कि किताबों के नाम पर चल रही यह वसूली गैर कानूनी है। अभिभावकों को यह अधिकार होना चाहिए कि वह बाजार से कहीं से भी किताबें खरीद सकें।

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