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15 हजार पैरामेडिकल छात्रों के भविष्य पर खतरा
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 22 Oct 2014 09:23 AM IST
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उत्तराखंड में पैरामेडिकल कोर्स में दाखिला लेने वाले 15 हजार से ज्यादा छात्रों का भविष्य अंधकार में है। इनकी परीक्षाएं जुलाई में होनी थी लेकिन दो छात्रों ने गढ़वाल विश्वविद्यालय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर दी। इसके बाद से परीक्षाएं अटक गई हैं और छात्र कॉलेजों के चक्कर काट रहे हैं।
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केंद्रीय विवि बनने से पहले वर्ष 2005 से 2009 तक गढ़वाल विवि ने संबद्धता की प्रक्रिया पूरी करने के लिए लगातार राज्य सरकार को पत्र भेजा लेकिन सरकार ने संबद्धता को हरी झंडी नहीं दी। हर साल सरकार की ओर से एनओसी देकर परीक्षा कराई जाती रही।
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कॉलेजों की संबद्धता ही नहीं
वर्ष 2009 में केंद्रीय विवि का दर्जा मिला। इसके बाद भी गत वर्ष तक एनओसी के आधार पर परीक्षा होती रही। कोर्स करने वाले कुछ छात्रों को जॉब आफर आया, जब वहां कॉलेज की संबद्धता का पत्र मांगा गया तो विवि ने देने से इनकार कर दिया, क्योंकि किसी भी पैरामेडिकल कॉलेज को संबद्धता नहीं मिली हुई है।
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इस पर दो छात्र हाईकोर्ट चले गए। मामला हाईकोर्ट में होने की वजह से बैचलर आफ रेडिया टेक्नोलॉजी, बीपीटी, बीएससी एमएलटी, बीएससी मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी जैसे कोर्स के छात्र परेशान हैं।
कुलपित का कहना
विवि कुलपति डॉ. एलजे सिंह का कहना है कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी पूर्ण कर ली थी। लेकिन मामला हाईकोर्ट में जाने की वजह से अब कोर्ट के दिशा निर्देश के आधार पर ही परीक्षा का रास्ता तय किया जा सकता है। नवंबर में मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है।
बेहद मुश्किल मेडिकल यूनिवर्सिटी
मेडिकल और पैरामेडिकल कॉलेजों की संबद्धता के लिए एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी तो बना दी गई है लेकिन यहां संबद्धता की फीस इतनी महंगी रखी गई है कि कॉलेज यहां जाने से कतरा रहे हैं। इस वजह से संबद्धता का मामला लटका हुआ है। नई यूनिवर्सिटी में दस लाख रुपये तक संबद्धता का शुल्क है जबकि दूसरे विवि में यह काफी कम है।