उत्तराखंडः छह हजार पैरामेडिकल छात्रों को कोर्ट से राहत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के 6000 पैरामेडिकल छात्रों के लिए बड़ी खबर है। 11 पैरामेडिकल संस्थानों में प्रथम वर्ष के इन छात्रों की परीक्षाएं कराने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट ने गढ़वाल विश्वविद्यालय को निर्देश जारी कर दिया है।
इसके साथ ही कॉलेजों की संबद्धता का विवाद भी समाप्त हो गया। एक्ट के मुताबिक अब सभी पैरामेडिकल कॉलेज गढ़वाल विवि से ही संबद्ध रहेंगे।
हर साल शासन से मिलने वाले पत्र के आधार पर परीक्षाएं कराने वाले गढ़वाल विवि ने इस बार यह कहते हुए पैरामेडिकल संस्थानों के प्रथम वर्ष के करीब छह हजार छात्रों की परीक्षाएं रोक दी थी कि उनकी संबद्धता पूर्ण नहीं है।
विवि के इस फैसले के खिलाफ संस्थान और छात्र हाईकोर्ट चले गए थे। मामले में हाईकोर्ट ने विवि को छात्रों के फार्म भरवाकर परीक्षाएं कराने के आदेश जारी कर दिए।
पैरामेडिकल संस्थानों की परीक्षाएं अटकने का मुद्दा अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। अमर उजाला ने मामले की तहकीकात में पाया था कि यहां कालेजों और छात्रों के मुकाबले संबद्धता पर सवाल उठाने वाला गढ़वाल विवि खुद सवालों के घेरे में है। अमर उजाला ने 12 नवंबर, 13 नवंबर और 30 नवंबर के अंक में प्रमुखता से संबद्धता और परीक्षाएं अटकने पर खबरें प्रकाशित की थीं।
शासन की तरफ से जारी हो चुकी है एनओसी
गढ़वाल विवि ने सभी पैरामेडिकल संस्थानों की परीक्षाएं रोकने के लिए इस बात को भी आधार बनाया था कि संस्थानों के पास सरकार की एनओसी नहीं है। इसके बाद शासन गत सप्ताह सभी 11 पैरामेडिकल संस्थानों को वर्ष 2006 से लेकर 2014 तक की एनओसी जारी कर चुका है।
इन कॉलेजों में अटकी थीं परीक्षाएं
-पंडित ललित मोहन राजकीय महाविद्यालय, ऋषिकेश
-बिहाईव कॉलेज आफ एडवांस स्टडीज, सेलाकुई
-डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज, मांडूवाला
-कंबाइंड पीजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, कुआंवाला
-श्री गुरु रामराय इंस्टीट्यूट, पटेलनगर, देहरादून
-उत्तरांचल कालेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड बायोमेडिकल साइंसेज, सहारनपुर रोड, देहरादून
-दून पीजी पैरामेडिकल कॉलेज, चकराता रोड
-सरदार भगवान सिंह पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेज, बालावाला
-साईं इंस्टीट्यूट एंड एलाइड साइंसेज, देहरादून
-शीतल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेज, रानीपोखरी
-हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जौलीग्रांट
अभी कोर्ट के फैसले की कॉपी नहीं मिली है। कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है, इसका पूरा पालन किया जाएगा। वैसे विवि पहले ही प्रथम वर्ष के छात्रों की परीक्षा की तैयारी पूरी कर चुका है।
-डॉ. पीएस राणा, कुलसचिव, गढ़वाल विवि