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शिक्षा में बैरियर न हो भाषा
अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Sun, 27 Oct 2013 12:53 PM IST
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पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के वीसी प्रो. जसपाल सिंह ने पीयू में ‘हायर एजूकेशन इन पंजाब-अचीवमेंट एंड चैलेंजिज’ विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन में कहा कि शिक्षा को लक्जरी नहीं, समाज के उत्थान का माध्यम होना चाहिए।
समय के साथ हर चीज में बदलाव जरूरी है। प्रो. जसपाल ने कहा कि शिक्षा में लैंग्वेज को बैरियर नहीं बनाना चाहिए। बच्चों को उनकी मातृ भाषाओं में ही शिक्षित किया जाना चाहिए।
उन्होंने माना कि आज के दौर में पिछड़े वर्ग और नारी शिक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उनका मानना है कि हर मुश्किल का हल अच्छी शिक्षा से ही निकाला जा सकता है।
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ग्रोथ के चक्कर में शिक्षा का स्तर गिरा: संधू
डिस्कशन में कुुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के वीसी डॉ. डीडीएस संधू (रिटायर्ड ले. जनरल) ने कहा कि उच्च शिक्षा की ग्रोथ रेट को 7 से 19 प्रतिशत करने के चक्कर में शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है।
शिक्षा की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। हायर एजूकेशन को बेहतर बनाने से पहले प्राइमरी स्तर पर शिक्षा का ढांचा मजबूत होना चाहिए।
उच्च शिक्षा के विस्तार को सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं करना चाहिए। उन्होंने उच्च स्तर पर रिसर्च को गहराई से लेने की बात पर भी जोर दिया।
उन्होंने माना कि बेहतर फंडिंग सिस्टम होने के कारण अमेरिका जैसे देश अधिक नोबेल जीत रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों में जब क्वालिटी रिसर्च होगा तभी इंडस्ट्री आएंगी। उन्होंने शिक्षकों को आत्ममंथन करने को कहा। शैक्षणिक संस्थानों में हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों को उन्होंने एक गलत ट्रेंड बताया।
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समय के साथ हर चीज में बदलाव जरूरी है। प्रो. जसपाल ने कहा कि शिक्षा में लैंग्वेज को बैरियर नहीं बनाना चाहिए। बच्चों को उनकी मातृ भाषाओं में ही शिक्षित किया जाना चाहिए।
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उन्होंने माना कि आज के दौर में पिछड़े वर्ग और नारी शिक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उनका मानना है कि हर मुश्किल का हल अच्छी शिक्षा से ही निकाला जा सकता है।
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ग्रोथ के चक्कर में शिक्षा का स्तर गिरा: संधू
डिस्कशन में कुुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के वीसी डॉ. डीडीएस संधू (रिटायर्ड ले. जनरल) ने कहा कि उच्च शिक्षा की ग्रोथ रेट को 7 से 19 प्रतिशत करने के चक्कर में शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है।
शिक्षा की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। हायर एजूकेशन को बेहतर बनाने से पहले प्राइमरी स्तर पर शिक्षा का ढांचा मजबूत होना चाहिए।
उच्च शिक्षा के विस्तार को सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं करना चाहिए। उन्होंने उच्च स्तर पर रिसर्च को गहराई से लेने की बात पर भी जोर दिया।
उन्होंने माना कि बेहतर फंडिंग सिस्टम होने के कारण अमेरिका जैसे देश अधिक नोबेल जीत रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों में जब क्वालिटी रिसर्च होगा तभी इंडस्ट्री आएंगी। उन्होंने शिक्षकों को आत्ममंथन करने को कहा। शैक्षणिक संस्थानों में हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों को उन्होंने एक गलत ट्रेंड बताया।