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OMG! 3125 स्कूली बच्चों के खिलाफ दर्ज होगी FIR
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 12 Jun 2015 12:07 PM IST
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हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड भिवानी ने बीते दिनों प्रदेश के विभिन्न निजी स्कूलों के 3125 बच्चों के दसवीं के परीक्षा परिणाम रद्द करने के साथ ही संबंधित स्कूलों को निर्देश जारी किया है कि इन सभी बच्चों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज कराई जाए।
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बोर्ड का दावा है कि परीक्षा परिणाम रद्द किए गए सभी बच्चों ने नौवीं में दाखिले के समय फर्जी एसएलसी (स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट) जमा कराए थे। बोर्ड के सचिव की ओर से जारी सर्कुलर से जहां बच्चों के अभिभावक चिंतित हैं, वहीं निजी स्कूल प्रबंधक भी पसोपेश में हैं।
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शिक्षा बोर्ड ने बीते 19 मई को पत्र संख्या 6619/ईएनपी/ए-2 के तहत संबंधित निजी स्कूलों के हेडमास्टरों/प्रिंसिपलों को निर्देश दिया है कि फर्जी एसएलसी या टीसी के जरिए दाखिला लेने वाले बच्चों पर एफआईआर करवाकर 15 दिन में इसकी सूचना शिक्षा बोर्ड को दी जाए।
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पत्र में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि संबंधित स्कूलों ने बच्चों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई तो शिक्षा बोर्ड ऐसे स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाएगा। शिक्षा बोर्ड के इस पत्र पर स्कूल प्रबंधन कानूनी राय ले रहे हैं। बोर्ड की ओर से यह पत्र पहले जारी कर दिया गया और कुल 3125 बच्चों का दसवीं का परीक्षा परिणाम इसी सप्ताह रद्द किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम का चिंताजनक पहलू यह भी है कि परीक्षा परिणाम रद्द किए गए सभी बच्चे 2013-14 में दाखिला लेने के बाद अब तक ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थी बन चुके हैं। यानी उनकी एसएलसी आदि पर फैसला बोर्ड द्वारा तीन साल बाद लिया गया है।
क्या है मामला
शिक्षा बोर्ड ने करीब तीन वर्ष पहले अन्य राज्यों से एसएलसी के आधार पर 3125 बच्चों को नौवीं कक्षा में एडमिशन देते हुए एनरोलमेंट नंबर जारी कर दिए थे। बच्चों ने दसवीं में बोर्ड की परीक्षा दी और उत्तीर्ण हो गए। बाद में बोर्ड ने एसएलसी को गलत ठहराते हुए बच्चों का परिणाम रोक दिया।
प्राइवेट स्कूल संघ ने आपत्ति के तहत तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मुलाकात की और बच्चों के बारे में सहयोग मांगा। सीएम के हस्तक्षेप के बाद बोर्ड ने बच्चों को ओपन परीक्षा के तहत लाकर दसवीं की डीएमसी जारी कर दी। अब बच्चों ने 11वीं भी परीक्षा भी पास कर ली है, लेकिन सरकार बदलते ही फिर बोर्ड ने इन बच्चों की डीएमसी को रद्द कर दिया है।
इससे बच्चों का तीन वर्ष की बैक लग जाएगी यानी 11वीं पास हो जाने के बाद उनका दसवीं का रिजल्ट रद्द हो जाने के कारण इन बच्चों को नौवीं कक्षा में बैठना पड़ेगा। यदि धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ तो उन्हें सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।
एफआईआर कराने से इंकार
हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने 3125 बच्चों के बारे में स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी फरमान का कड़ा विरोध करते हुए साफ कह दिया है कि स्कूल अपने बच्चों के खिलाफ एफआईआर नहीं दर्ज कराएंगे। बोर्ड के सर्कुलर के बारे में स्कूल प्रबंधकों ने कानूनविदों से राय लेनी शुरू कर दी है ताकि बोर्ड को जवाब भी दिया जा सके।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने शिक्षा बोर्ड के रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कोई भी निजी स्कूल बच्चों के प्रति ऐसा कदम नहीं उठाएगा और यदि बोर्ड को एसएलसी आदि पर संदेह है तो उस पर ठोस प्रमाण भी प्रस्तुत किए जाएं।
उन्होंने बोर्ड के कदम को आनन-फानन में लिया फैसला करार देते हुए कहा कि बच्चों के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर उनके पूरे जीवन और पूरे कैरियर को बर्बाद कर देगी। बच्चों का परीक्षा परिणाम रद्द किए जाने के मसले पर बुलाई गई संघ की एक बैठक में उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और शिक्षा बोर्ड बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर रिजल्ट रद्द होने के बाद अब अगर किसी बच्चे ने अपने तीन वर्ष खराब होते देखकर कोई गलत कदम उठा लिया तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और शिक्षा बोर्ड की होगी।