फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   online form creats problem for scholarship

ऑनलाइन के फेर में फंसी हजारों छात्रों की छात्रवृत्ति

Fri, 04 Oct 2013 01:13 AM IST
आशीष त्रिवेदी /लखनऊ
आशीष त्रिवेदी /लखनऊ Updated Fri, 04 Oct 2013 01:13 AM IST
विज्ञापन
online form creats problem for scholarship
एलयू में एलएलबी तृतीय सेमेस्टर के छात्र शहाबुद्दीन अहमद ‘समीर’ ने शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति पाने के लिए फॉर्म भरकर बीती 21 अगस्त को जमा कर दिया था।
विज्ञापन


इसमें उसने आय प्रमाणपत्र की कूल कॉपी सहित अन्य प्रमाणपत्रों की फोटोकॉपी लगाई थी। तीन अक्तूबर को जब वह विवि पहुंचा तो पता चला कि समाज कल्याण विभाग ने पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। अब वे दोबारा इसके लिए दौड़भाग कर रहे हैं।
विज्ञापन


एमए समाजशास्त्र के छात्र राकेश कुमार का भी यही हाल है। वे कहते हैं कि आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए न जाने कितने धक्के खाए। जो फॉर्म भरकर जमा किया है उसमें आय प्रमाणपत्र की मूल कॉपी लगाना अनिवार्य था।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए आय प्रमाणपत्र चाहिए। जब इसका प्रिंट आउट निकालेंगे तो उसके साथ मूल आय प्रमाणपत्र चाहिए। छात्रवृत्ति अनुभाग में जमा हजारों आवेदनों में अपना फॉर्म खोजना बहुत मुश्किल है।

यह हाल सिर्फ इन दो छात्रों का नहीं है बल्कि लखनऊ विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब दस हजार छात्रों का है। जो फीस प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन फॉर्म भर चुके हैं। अब उनके सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हो रही हैं।

छात्र शहाबुद्दीन कहते हैं कि हमारे पास सभी डॉक्यूमेंट की फोटो कॉपी थी। मैंने गुरुवार को ऑनलाइन फॉर्म भरना शुरू किया तो कॉलम नंबर छह में फंस गया। क्योंकि मेरे आय प्रमाणपत्र पर जो क्रमांक 650111325340 है वह 12 अंकों का है। जबकि इसमें 11 अंकों से ज्यादा की डिजिट स्वीकार नहीं हो रही।

केकेसी के बीएससी तृतीय वर्ष के छात्र अवधेश कहते हैं कि हमें जो फीस रसीद मिली है उसमें सात अंकों की डिजिट है। ऑनलाइन फॉर्म के कॉलम नंबर 39 में 6 डिजिट से ज्यादा स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं।

दरअसल लखनऊ विश्वविद्यालय, डिग्री कॉलेज प्रशासन व समाज कल्याण विभाग के बीच संवादहीनता का खामियाजा हजारों छात्रों को उठाना पड़ रहा है।

डीएवी पीजी कॉलेज के बीए तृतीय वर्ष के छात्र गोविंद कुमार कहते हैं कि अगर हमें पहले ही बता दिया गया होता तो हमें दो-दो बार फॉर्म भरने के लिए परेशान नहीं होना पड़ता।


छात्रों को जानकारी देना चुनौती  
लखनऊ विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों के करीब दस हजार स्टूडेंट जो ऑफलाइन फॉर्म भरकर जमा कर चुके हैं, उन्हें बदली प्रक्रिया के बारे में सूचना देना आसान काम नहीं होगा। एलयू में फॉर्म जमा कर चुके स्टूडेंट्स का कहना है कि पहले विवि प्रशासन हमसे कह रहा था कि ऑनलाइन फीडिंग करके खुद फॉर्म भरवा देंगे। मगर अब उसने हाथ खड़े कर लिए हैं। क्योंकि अब तक करीब पांच हजार छात्र छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के फॉर्म भर चुके हैं। कहीं छात्रों के मूल आय प्रमाणपत्र खो गए तो उन्हें दोबारा बनवाना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed