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नर्सिंग की सीटों की कमी, कहीं खेल तो नहीं?

Wed, 18 Sep 2013 09:58 PM IST
अमर उजाला, आफताब अजमत, देहरादून
अमर उजाला, आफताब अजमत, देहरादून Updated Wed, 18 Sep 2013 09:58 PM IST
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nurshing counselling game in dehradun

राजधानी देहरादून में प्राइवेट नर्सिंग संस्थानों को राज्य नर्सिंग परिषद से मान्यता न होने के कारण उनकी सीटें सरकारी काउंसिलिंग में शामिल नहीं हो पाई। प्रदेश के करीब 250 होनहारों को इसका सीधा नुकसान हुआ है। अब इसके फायदों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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अभिभावकों का आरोप है कि उन्होंने सरकारी काउंसिलिंग शुरू होने से पहले प्राइवेट संस्थानों में सीधे संपर्क किया। कुछ प्राइवेट संस्थानों ने उनसे डोनेशन की मांग की है जबकि कुछ संस्थान अपनी सीटें पहले ही फुल होने का दावा कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि स्टेट नर्सिंग काउंसिल ने समय पर कदम उठाया होता तो निश्चित तौर पर यह दिक्कत पैदा ही न होती।
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कमाई के फेर में
सूत्रों के मुताबिक प्राइवेट संस्थानों ने अपनी कमाई के फेर में राज्य से मान्यता नहीं ली। इस वजह से उनकी सरकारी कोटे की सीटें भी प्राइवेट में तब्दील हो गई। इसमें जहां नर्सिंग काउंसिल की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है तो दूसरी ओर नर्सिंग संस्थानों की मनमानी भी सामने आ रही है। संस्थानों का तर्क है कि उनकी सरकारी सीटों पर कब्जा करने की कोई मंशा नहीं है। स्टेट नर्सिंग काउंसिल को सही वक्त पर ताकीद करनी चाहिए थी तो वह निश्चित तौर पर अपनी सीटें दे देते।

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