नर्सरी एडमिशन: सुप्रीम कोर्ट में भी पेंच
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा निदेशालय ने भी इंटर स्टेट ट्रांसफर केटेगरी के उन 24 आवेदकों को दाखिला देने की बात कही है जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी।
निदेशालय ने यह साफ कर दिया है कि जनवरी के बाद से लेकर नौ अप्रैल तक जिन बच्चों के एडमिशन हो चुके हैं वह वैध माने जाएंगे। स्कूलों को नर्सरी दाखिला प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 12 मई तक पूरा करने को कहा गया है। वहीं आदेश के बाद से उन अभिभावकों की उम्मीदें समाप्त हो गई हैं जो राहत की आस में थे।
निदेशालय की अतिरिक्त शिक्षा निदेशक (एक्ट-1) डॉ. मधु रानी तेवतिया ने दाखिले को लेकर आदेश जारी किया है। आदेश में साफ किया है कि कोर्ट से राहत पाए 24 बच्चों के दाखिले पिछले साल दिसंबर में एलजी की गाइडलाइंस के हिसाब से ही होंगे।
अभी भी सीट बाकी है तो लॉटरी से होगा निर्णय
इसके साथ ही इन 24 दाखिलों के लिए स्कूलों को कहा गया है कि वह इस बात को सुनिश्चित कर लें कि 27 फरवरी के निदेशालय के आदेश से पहले चयनित हो चुके हैं।
यदि इन बच्चों का चयन एक से ज्यादा स्कूल में हुआ होगा तो उन्हें किसी एक स्कूल में 12 मई तक फीस जमा कराकर सीट पक्की करनी होगी। वहीं निदेशालय के निर्देशानुसार नौ अप्रैल तक स्कूलों में हो चुके दाखिले वैध माने जाएंगे, यदि कहीं सीटें बची हैं तो उन्हें जल्द से जल्द लॉटरी के माध्यम से भरने को कहा गया है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को प्रक्रिया पूरी होने वाली थी, लेकिन उससे एक दिन पहले इंटरस्टेट ट्रांसफर केटेगरी में धांधली के आरोप में इंटरस्टेट ट्रांसफर श्रेणी के पांच प्वाइंट को खत्म करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया था।
अब सीटें नहीं बढाई जाएंगी
नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस (एनपीएससी) की अध्यक्ष अमिता मूला वट्टल ने कहा कि कोर्ट से जिनको राहत मिली है उनके एडमिशन हो चुके हैं। ऐसे में अब सीट बढ़ाने की नौबत भी नहीं आएगी। श्ानिवार से प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
इसके संबंध में जानकारी वेबसाइट पर डाल दी जाएगी। राजधानी में अधिकतर स्कूल 15 मई के बाद से बंद हो रहे हैं। ऐसे में प्रयास रहेगा कि इसी दौरान प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। स्कूल बंद होने से पहले बच्चों और अभिभावकों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम भी होंगे।
जिन्हें नहीं मिला एडमिशन, अब नहीं मिल पाएगा
नर्सरी एडमिशन डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने कहा कि निदेशालय के आदेश के बाद पूरी तस्वीर साफ हो गई है। जो अभिभावक ट्रांसफर के अंक वापस आने की आशंका के चलते असमंजस में पड़ गए थे उनका डर खत्म हो गया है।
हालांकि दाखिला नहीं पाने वाले बच्चों के अभिभावकों की उम्मीद समाप्त हो गई है। अब यदि वे कोर्ट का रुख करते भी हैं तो राहत मिलनी मुश्किल है क्योंकि पहले से ही प्रक्रिया काफी लंबी खींच चुकी है। ऐसे में कोर्ट भी रोक लगाने का आदेश जारी नहीं करेगा।