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नर्सरी दाखिला: AAP ने दिया राहत का मरहम
रश्मि शर्मा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 17 Jan 2014 04:32 PM IST
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दिल्ली में नर्सरी दाखिलों के लिए फीस पर स्कूलों की मनमानी से परेशान रहने वाले अभिभावकों को शिक्षा निदेशालय ने इस बार राहत का पैकेज दिया है।
शिक्षा निदेशालय ने दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही फीस और फीस रिफंड पॉलिसी पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। इसे सबसे अहम यह है कि स्कूल एक साथ तीन माह की फीस नहीं ले सकते।
हर साल दाखिले के बाद पहली और दूसरी सूची आते ही अभिभावकों के सामने स्कूलों की मनमानी खड़ी हो जाती है। लेकिन इस बार एफएक्यू (लिखित सवाल-जवाब) के माध्यम से फीस को लेकर सवालों को निदेशालय ने साफ कर दिया है।
जहां स्कूलों को एक साथ तीन माह की ट्यूशन फीस लेने की मनाही है, वहीं अगर दाखिले के समय मूल दस्तावेज जमा नहीं कराने से दाखिला रद्द हो जाता है या जमा कराए गए दस्तावेज वेरिफिकेशन के दौरान गलत व झूठे पाए जाते हैं, तो ऐसी सूरत में स्कूल को पंजीकरण शुल्क को छोड़कर पूरी फीस लौटानी होगी।
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इसके साथ ही अभिभावक दाखिला लेने के एक माह के भीतर नाम वापस लेता है तो स्कूल पंजीकरण शुल्क, दाखिला फीस और ट्यूशन फीस केवल एक माह की ही रख सकता है। बाकी पूरी फीस और अन्य राशि स्कूल को 15 दिनों के भीतर रसीद के साथ लौटानी होगी।
फीस पर अभिभावकों की लड़ाई लड़ते आ रहे ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल कहते हैं कि सरकार को कहा गया है कि फीस को रेगुलेट करने के लिए तमिलनाडु की तर्ज पर एक कानून बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि स्कूल मैनेजमेंट कमेटी में 50 फीसदी अभिभावकों के प्रतिनिधित्व की भी सिफारिश की गई है। अगर स्कूल फीस पर मनमानी करें या रिफंड देने में आनाकनी करें तो अभिभावकों को खुद ही इस मामले की शिकायत करनी चाहिए।
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शिक्षा निदेशालय ने दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही फीस और फीस रिफंड पॉलिसी पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। इसे सबसे अहम यह है कि स्कूल एक साथ तीन माह की फीस नहीं ले सकते।
हर साल दाखिले के बाद पहली और दूसरी सूची आते ही अभिभावकों के सामने स्कूलों की मनमानी खड़ी हो जाती है। लेकिन इस बार एफएक्यू (लिखित सवाल-जवाब) के माध्यम से फीस को लेकर सवालों को निदेशालय ने साफ कर दिया है।
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जहां स्कूलों को एक साथ तीन माह की ट्यूशन फीस लेने की मनाही है, वहीं अगर दाखिले के समय मूल दस्तावेज जमा नहीं कराने से दाखिला रद्द हो जाता है या जमा कराए गए दस्तावेज वेरिफिकेशन के दौरान गलत व झूठे पाए जाते हैं, तो ऐसी सूरत में स्कूल को पंजीकरण शुल्क को छोड़कर पूरी फीस लौटानी होगी।
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इसके साथ ही अभिभावक दाखिला लेने के एक माह के भीतर नाम वापस लेता है तो स्कूल पंजीकरण शुल्क, दाखिला फीस और ट्यूशन फीस केवल एक माह की ही रख सकता है। बाकी पूरी फीस और अन्य राशि स्कूल को 15 दिनों के भीतर रसीद के साथ लौटानी होगी।
फीस पर अभिभावकों की लड़ाई लड़ते आ रहे ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल कहते हैं कि सरकार को कहा गया है कि फीस को रेगुलेट करने के लिए तमिलनाडु की तर्ज पर एक कानून बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि स्कूल मैनेजमेंट कमेटी में 50 फीसदी अभिभावकों के प्रतिनिधित्व की भी सिफारिश की गई है। अगर स्कूल फीस पर मनमानी करें या रिफंड देने में आनाकनी करें तो अभिभावकों को खुद ही इस मामले की शिकायत करनी चाहिए।