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नर्सरी दाखिला: दांव पर लगा बच्चों का भविष्य

Thu, 16 Jan 2014 11:49 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 16 Jan 2014 11:49 AM IST
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nursery admission case in highcourt

दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सरी दाखिला विवाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। निजी स्कूलों ने उपराज्यपाल नजीब जंग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दी है।

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उनका तर्क है कि प्रबंधन कोटा समाप्त करना व नेबरहुड मुद्दे में हस्तक्षेप गैरकानूनी है। इस फैसले की बेंच ने कोई तारीख निर्धारित नहीं की है, लेकिन शुक्रवार को फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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मुख्य न्यायाधीश एन.वी.रमन और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की खंडपीठ ने निजी स्कूलों, दिल्ली सरकार व सोशल ज्युरिस्ट संस्था का पक्ष सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
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खंडपीठ ने कहा यह काफी गंभीर मामला है और इससे नर्सरी के बच्चों का भविष्य दांव पर है। ऐसे में वे जल्द से जल्द अपना फैसला देंगे। इससे पूर्व दिल्ली सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि फैसला आने तक स्कूलों को तय दिशा-निर्देशों के तहत दाखिले प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं करेंगे।

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निजी स्कूलों के वकीलों ने मुख्य तौर पर बार-बार स्वायत्तता का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना स्वायत्तता पर प्रहार है। उन्होंने अधिसूचना को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2002 में दिए उस फैसले के भी खिलाफ बताया जिसमें निजी शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता बनाए रखने को कहा गया था।

खंडपीठ ने उनके तर्क पर कड़ी टिप्पणी जताते हुए कहा कि आप आखिर बार-बार अंतरिम राहत देने की मांग पर जोर क्यों दे रहे हैं। ऐसा लगता है कि प्रबंधन कोटा समाप्त करने की वजह से याचिकाकर्ता स्कूल ज्यादा परेशान हैं।

एसोसिएशन के अधिवक्ता एनके कौल ने कहा कि अधिसूचना में ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो व्यवहारिक नहीं हैं। उन्होंने कहा नेबरहुड में 70 प्वाइंट देने से बच्चे अपने पसंद के स्कूल में दाखिला लेने से वंचित हो जाएंगे। यदि किसी क्षेत्र में अच्छा स्कूल नहीं है तो बच्चों को मजबूरन आसपास के ही स्कूल में दाखिला लेना होगा।

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वहीं, दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने नेबरहुड के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि स्कूलों में दाखिले का पहला अधिकार पड़ोस में रहने वाले बच्चे का है।उन्होंने कहा कि स्कूलों को मान्यता इसी शर्त पर दी जाती है कि वह पड़ोस के बच्चों को दाखिला देंगे और मुनाफा नहीं कमाएंगे।

अगले आदेश तक दाखिला स्थगित
निजी स्कूलों में नर्सरी में दाखिले के लिए शुरू होने वाली रेस अब कोर्ट के अगले आदेश तक के लिए स्थगित हो गई है। कोर्ट के फैसले के बाद यदि जरूरत पड़ी तो दाखिले की तिथि को आगे बढ़ाया जा सकता है। दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष आर सी जैन ने कहा कि अब दाखिला फॉर्म 16 जनवरी से नहीं मिलेंगे।

पैरेंट्स भी असमंजस में
एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने बताया कि कोर्ट के अपने आदेश को सुरक्षित रखने के बाद से उनकी वेबसाइट पर लगातार अभिभावक अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कई अभिभावक 16 जनवरी की छुट्टी ले चुके हैं, अब जब बृहस्पतिवार को भी फॉर्म नहीं मिलेंगे तो उन्हें अगली तिथियों तक परेशान ही होते रहना पड़ेगा।

एक-दो स्कूलों ने देने शुरू किए फॉर्म
नर्सरी दाखिले शुरू होने को लेकर भले ही कोई आदेश न आए हों लेकिन बुधवार को इक्का-दुक्का स्कूलों ने फॉर्म देने शुरू कर दिए। प्रसाद नगर स्थित फेथ एकेडमी ने सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक फॉर्म जारी किए।


फॉर्म 25 रुपये में ही बेचा गया। प्रोस्पेक्टस की कीमत 175 रुपये रखी गई। जिसे वैकल्पिक रखा है। वहीं मयूर विहार स्थित वनस्थली स्कूल ने भी फॉर्म प्रोस्पेक्टस के साथ 200 रुपये में देने शुरू किए। माना जा रहा है कि बृहस्पतिवार को भी कुछ स्कूल फॉर्म देना शुरू कर सकते हैं।

लॉटरी की होगी वीडियो रिकॉर्डिंग
नर्सरी दाखिला प्रक्रिया को लेकर उपराज्यपाल के निर्देश पर जारी नियमों को लेकर अभिभभावकों में बने संशय को निदेशालय ने बुधवार को एफएक्यू (फ्रीक्वेंटली आस्क क्वेश्चन) जारी कर दूर कर दिया। इन जारी लिखित सवाल जवाबों में एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम के माध्यम से अभिभावकों के लिए पूछे गए सवालों के जवाब दिए गए।

इनमें सबसे अहम सामान्य श्रेणी के तहत एक जैसे अंक आने पर बच्चों का दाखिला करने के लिए लॉटरी की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का आदेश है। निदेशालय ने एफएक्यू के माध्यम से बताया है कि स्कूलों को न सिर्फ प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग करनी होगी बल्कि उस जानकारी को चयनित छात्रों की सूची के साथ संबंधित उपशिक्षा निदेशक को एक से दो दिन के अंदर सौंपनी होगी।

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