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नर्सरी दाखिलाः 6 को हाईकोर्ट में हो सकती है सुनवाई

Sat, 04 Jan 2014 12:39 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 04 Jan 2014 12:39 PM IST
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nursery admission case in high court

नई दिल्ली के निजी स्कूलों ने नर्सरी दाखिलों के लिए तय दिशानिर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। स्कूलों ने एलजी के आदेश से शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी गाइडलाइन को रद्द करने का आग्रह किया है। इस याचिका पर 6 जनवरी को सुनवाई होने की संभावना है।

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मुख्य न्यायाधीश एनवी रामना की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष गैर सहायता प्राप्त स्कूलों की एक्शन कमेटी ने दायर याचिका में 18 दिसंबर को जारी गाइडलाइन को गैरकानूनी व मनमाना बताया है। स्कूलों ने कहा है कि सरकार को 75 फीसदी समान्य सीटों पर दाखिले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
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अहम है कि जारी गाइडलाइन के तहत नर्सरी दाखिला प्रक्रिया 15 जनवरी से शुरू होगी। इसके तहत आवेदन करने की अंतिम तारीख 31 जनवरी निर्धारित की गई है।

एक्शन कमेटी ने याचिका में कहा है कि नर्सरी और प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिले के लिए दिशानिर्देश बनाना उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। याची कमेटी के वकील कमल गुप्ता ने इस फैसले को निजी स्कूलों की स्वायत्तता पर प्रहार बताया है। उन्होंने इसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2002 में दिए उस फैसले के भी खिलाफ बताया जिसमें निजी शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता बनाए रखने को कहा गया था।
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केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने 23 नवंबर 2010 को दाखिलों के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए थे जिसमें स्पष्ट किया गया था कि सामान्य श्रेणी की 75 फीसदी सीटों पर निजी स्कूल अपनी दाखिला नीति तय कर सकते है। उन्होंने कहा इस दिशानिर्देश को सर्वोच्च न्यायालय ने भी मंजूरी प्रदान कर दी थी।

याची ने कहा कि उपराज्यपाल ने बिना उनका पक्ष सुने एक तरफा निर्णय लिया है। वहीं नर्सरी दाखिलों के लिए गठित गांगुली कमेटी की सिफारिशों को भी नजरअंदाज किया गया है।


अहम है कि 18 दिसंबर को जारी एडमिशन गाइडलाइन के तहत नर्सरी और प्री-प्राइमरी कक्षा में दाखिलों में प्रबंधन कोटा समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने 27 दिसंबर को प्रबंधन कोटा बहाल करने की संबंधी निजी स्कूलों की मांग को ठुकराते हुए स्कूल में 8 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले बच्चों को 70 अंक देने का प्रावधान कर दिया था। याचिका में केंद्र व दिल्ली सरकार शिक्षा विभाग व उपराज्यपाल को पक्ष बनाया गया है।

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