छात्र चुनाव में राहुल का संगठन जीता, 5 कारण
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एनएसयूआई ने छात्रों से सीधे संपर्क बढाया। इसके लिए गठबंधन बनाया। मोदी और भाजपा फैक्टर के बावजूद वे एबीवीपी का प्रभाव कम करने में सफल रहे, जबकि सोई से कड़ी चुनौती मिली।
एक सप्ताह में बदली हवा
एक सप्ताह पहले तक एनएसयूआई की कैंपस में ज्यादा पकड़ नहीं थी, लेकिन पीयू की छात्र राजनीति के माहिर खिलाड़ी बरिंदर ढिल्लों ने साथियों के साथ जब कैंपस में कदम रखा तो समीकरण बदल गए। इसलिए इस वनमैन शो भी कहा जा रहा है। उन्हें पुराने दिग्गज मनोज लुबाणा और हरप्रीत मुल्तानी का भी साथ मिला।
छात्राओं के वोट पर पकड़
पीयू में करीब 65 फीसदी वोट छात्राओं के ही हैं। एनएसयूआई ने इस वोट बैंक पर पकड़ बनाने के लिए उनकी हॉस्टलों से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनकी मांगों को लेकर संगठन के सदस्यों ने गर्ल्स होस्टल के सामने चार दिन भूख हड़ताल रखी।
मुद्दे के बात
पिछले कार्यकाल में एनएसयूआई ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को न सिर्फ प्रमुखता से उठाया बल्कि उन्हें हल भी करवाया। इनमें फीस बढ़ोतरी, रिवेल्यूशन, शटर सर्विस, हॉस्टल की समस्याएं मुख्य रहीं।
एकजुटता
जहां मुख्य प्रतिद्वंद्वी सोपू और पुसू दोनों चुनाव से पहले ही दो और तीन हिस्सों में बंट गए, वहीं एनएसयूआई न केवल एकजुट रहा बल्कि एनएसओ और हिमसू को भी साथ जोड़ने में सफल रहा।
अध्यक्ष सहित 3 पदों पर एनएसयूआई का कब्जा
पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के छात्र काउंसिल चुनाव में लगातार दूसरे साल नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) गठबंधन ने जीत हासिल की। इतना ही नहीं गठबंधन ने इस बार अध्यक्ष सहित तीन पदों पर कब्जा किया, जबकि पिछले साल दो ही पद जीते थे।
हालांकि इस बार मुकाबला कड़ा रहा और जीत का अंतर कम। इस वजह से अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद के लिए पीयू को दोबारा से मतों की गिनती करानी पड़ी और शाम 7.30 बजे आधिकारिक तौर पर परिणाम की घोषणा हो पाई।
ये रहे विजेता
अध्यक्ष : दिव्यांशु भारद्वाज (2249 मत, एनएसयूआई-हिमसू-एनएसओ गठबंधन), अंतर : 58
उपाध्यक्ष : स्निग्धा बावा (2614, एनएसयूआई-हिमसू-एनएसओ गठबंधन), 288
सचिव : अंकुर सहरावत (2953, एनएसयूआई-हिमसू-एनएसओ गठबंधन), 512
संयुक्त सचिव : अभिषेक थापर (2453, पुसू-जीजीएसयू-एचएसए-एचपीएसयू-एसएफआई), 76
ये गठबंधन थे मैदान में
एनएसयूआई-हिमसू-एनएसओ
पुसू-जीजीएसयू-एचएसए-एचपीएसयू-एसएफआई
सोई-इनसो-सोपू-युवा
अकेले लड़े : एबीवीपी, एसएफएस, एचपीएसयू और सोपू से टूटा गुट
एबीवीपी का सफाया
यह लगातार दूसरा साल है जब पीयू में वर्षों से दबदबा बनाए छात्र संगठन पुसू और सोपू का बड़ी हार झेलनी पड़ी। देश में मोदी लहर के बावजूद एबीवीपी का भी पूरी तरह से सफाया हो गया। उसके उम्मीदवार मुकाबले में काफी पीछे रहे।