उत्तराखंड के किसी छात्र को यूजीसी की पीजी फैलोशिप नहीं
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उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों की लापरवाही प्रतिभाओं पर भारी पड़ी है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों की ओर से रैंक होल्डर्स के नाम ही यूजीसी को नहीं भेजे गए। इस वजह से उत्तराखंड के एक भी छात्र को यूजीसी की पीजी फैलोशिप फॉर यूनिवर्सिटी रैंक होल्डर्स नहीं मिलेगी।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से पीजी फैलोशिप फॉर यूनिवर्सिटी रैंक होल्डर्स के चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई है। साथ ही जरूरी प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं करा पाने के चलते जिन छात्रों का दावा अस्वीकार किया है, उनकी सूची भी है।
हैरत की बात यह है कि दोनों सूची में प्रदेश के 10 राज्य विश्वविद्यालयों में से एक भी छात्र का नाम नहीं है। इतना ही नहीं प्रदेश में स्थापित केंद्रीय विवि एचएनबी गढ़वाल का नाम भी सूची से गायब है।
दोनों सूची में प्रदेश के किसी विश्वविद्यालय के छात्र का नाम नहीं होना साबित करता है कि उत्तराखंड के किसी विश्वविद्यालय ने यूजीसी में फैलोशिप के लिए दावा दाखिल नहीं किया। अगर विश्वविद्यालय औपचारिकताएं पूरी कर रैंक होल्डर्स के नाम भेजते तो प्रदेश की कई प्रतिभाओं को आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन मिल सकता था।
एक विश्वविद्यालय से कई को मिल सकती है फैलोशिप
विश्वविद्यालयों को रैंक होल्डर्स के नाम 30 सितंबर तक यूजीसी को भेजने थे। एक विश्वविद्यालय अपने यहां चलने वाले सभी स्नातक कोर्सों के रैंक होल्डर्स (संबंधित कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्तकर्ता) के नाम भेज सकता है। यानी विश्वविद्यालय बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए और बीसीए आदि स्नातक स्तर के कोर्स के अलग-अलग रैंक होल्डर्स की सूची यूजीसी को भेज सकता है। इस तरह एक ही विश्वविद्यालय से कई-कई रैंक होल्डर्स को यूजीसी की पीजी फैलोशिप मिल सकती है।
पीजी का पूरा खर्च उठाती है यूजीसी
यूजीसी फैलोशिप के लिए चयनित रैंक होल्डर्स का पूरा खर्च उठाती है। इसमें पीजी के दौरान पढ़ाई की फीस और हॉस्टल आदि का खर्च शामिल है। यह फैलोशिप हासिल करने वाले रैंक होल्डर्स बिना किसी खर्च के पीजी कर सकते हैं।
बोलीं मंत्री
यह मामला संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो गलत है। देहरादून आकर मामले की जानकारी ली जाएगी। भविष्य में लापरवाही नहीं हो, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा।
-डॉ. इंदिरा ह्दयेश, उच्च शिक्षा मंत्री उत्तराखंड