UGC की लिस्ट ने उत्तराखंड में उच्च शिक्षा को दिखाया आइना
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स्कूल एजूकेशन में दून के स्कूलों का देश दुनिया में नाम है, लेकिन उच्च शिक्षण संस्थानों की राष्ट्रीय वरीयता सूची से उत्तराखंड बाहर है। कॉलेज विद पोटेंशियल फॉर एक्सीलेंस (सीपीई) के लायक प्रदेश का एक भी कॉलेज नहीं है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने हाल ही में देश के 243 चयनित कॉलेजों की सूची जारी की है। अब यह कॉलेज अपने प्रस्ताव समिति के सामने रखेंगे, जिसके आधार पर इनकी ग्रांट की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यूजीसी ने सभी कॉलेजों को पत्र भेजकर प्रस्ताव मांगे थे। यूजीसी की ओर इसके लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज मांगे थे, जिसमें नैक का प्रमाण पत्र भी शामिल है।
देशभर से कॉलेजों से इसके लिए प्रस्ताव मांगे, लेकिन प्रदेश से एक भी कॉलेज का प्रस्ताव नहीं गया। दरअसल, शिक्षा की गुणवत्ता के मामले में प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थान बेहद पिछड़े हैं।
यूजीसी ने जो सूची जारी की है, उसमें आंध्र प्रदेश के 26, असम के चार, बिहार के छह, छत्तीसगढ़ के दो, गोवा के तीन, गुजरात के 20, हरियाणा के सात, जम्मू-कश्मीर के सात, झारखंड का एक, कर्नाटक के 32, केरल के 16, मध्य प्रदेश के चार, महाराष्ट्र के 55, मणिपुर के तीन, मिजोरम के तीन, नागालैंड का एक, पंजाब के सात, राजस्थान के पांच, तमिलनाडु के 11, तेलंगाना के तीन, त्रिपुरा के दो, उत्तर प्रदेश के 16 और पश्चिमी बंगाल के नौ कॉलेज शामिल हैं।
यूजीसी के पैमानों पर खरा नहीं उतरा एक भी संस्थान
उत्तराखंड का एक भी उच्च शिक्षा संस्थान यूजीसी के पैमानों पर खरा नहीं उतर पाया है। चयनित सभी कॉलेजों के प्रिंसिपल को 27 जनवरी से 30 जनवरी के बीच अपने कॉलेज के संबंध में 20 मिनट की प्रेजेंटेशन देनी होगी। इसके बाद चयन समिति की ओर से कॉलेजों को सीपीई स्टेटस देने के लिए चयनित किया जाएगा।
इनका है कहना
यूजीसी के सीपीई स्टेटस के लिए सबसे अनिवार्य शर्त नैक ग्रेड ए की है जो कि यहां के किसी भी कॉलेज को नहीं मिला हुआ है। लिहाजा, कॉलेज यूजीसी में आवेदन नहीं कर पाए।
-डॉ. सतपाल सिंह साहनी, कॉर्डिनेटर, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान