UPTU: तोमर को राजभवन से भी नहीं मिली राहत
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निलंबित चल रहे यूपीटीयू के पूर्व रजिस्ट्रार यूएस तोमर को राजभवन से भी झटका लग गया है। यूएस तोमर ने कुलपति द्वारा की गई कार्रवाई और जांच कमेटी को गलत बताते हुए राज्यपाल को अपना प्रत्यावेदन दिया था। मगर राजभवन ने उनके आरोपों को बलहीन करार देते हुए कुलपति द्वारा की गई कार्रवाई पर अपनी मुहर लगा दी है।
राजभवन ने स्पष्ट कहा है कि विश्वविद्यालय का सजग प्रहरी व संवैधानिक शासक कुलपति ही होता है और वह किसी भी अधिकारी द्वारा अनुशासनहीनता करने व गलत कृत्य करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज करने के बाद अब राजभवन से भी यूएस तोमर को राहत नहीं मिली है, बल्कि कुलपति प्रो. आरके खांडल द्वारा की गई कार्रवाई को सही बताया गया है।
3 जुलाई 2014 को कर दिया गया था निलंबित
उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के पूर्व रजिस्ट्रार यूएस तोमर को सत्र 2013-14 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित संबद्घता की समय सीमा 15 मई के बाद इंजीनियरिंग कॉलेजों को मान्यता देने, खुद अपने स्तर पर अलग वेबसाइट बनाकर कॉलेजों की संबद्घता के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगने और यूनिवर्सिटी से अलग खाता खोलकर लाखों रुपये संबद्घता शुल्क जमा करने के आरोप में कुलपति प्रो. आरके खांडल ने गत 22 मई 2014 को रजिस्ट्रार पद से हटा दिया था।
कुलपति ने न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी भी बना दी थी। जांच कमेटी की रिपोर्ट में यूएस तोमर को दोषी पाया गया और उसके बाद सरकार ने भी 3 जुलाई 2014 को उन्हें निलंबित कर दिया था।
इसके बाद यूनिवर्सिटी में एक पीसीएस अधिकारी को रजिस्ट्रार बनाकर भेज दिया था। राजभवन में यूएस तोमर द्वारा जो अपील की गई थी उसमें कुलपति द्वारा गठित की गई जांच कमेटी पर सवाल उठाए गए थे।
कुलपति द्वारा रजिस्ट्रार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती इस पर सवाल खड़े किए थे और कुलपति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। राजभवन ने इस मामले की जांच की और पूर्व रजिस्ट्रार द्वारा लगाए गए आरोप व प्रस्तुत कथन को बलहीन करार दिया है।
कुलपति को है एक्शन लेने का अधिकार
राजभवन ने सुप्रीम कोर्ट के मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी बनाम शेषराव बलवंतराव चौहान केस का जिक्र करते हुए कहा है कि कुलपति यूनिवर्सिटी का सजग प्रहरी होता है और वह ही संवैधानिक शासक भी है।
विश्वविद्यालय के कुलपति को यह अधिकार है कि वह यूनिवर्सिटी में किसी भी अधिकारी द्वारा किए गए गलत कृत्य को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के प्रति कुलपति प्रो. दिवाकर सिंह यादव को हटा दिया गया है। मंगलवार को कुलपति प्रो. आरके खांडल की ओर से इसका आदेश जारी कर दिया गया है।
सूत्रों की मानें तो प्रो. दिवाकर सिंह यादव आईईटी में निदेशक पद के लिए दावेदार थे। आईईटी में ही वह कम्प्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर हैं।
ऐसे में अब जो नए निदेशक आए हैं वह प्रति कुलपति होने के नाते इन्हें रिपोर्ट करते। इसे लेकर कोई असहज स्थिति न पैदा हो इसलिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह फैसला लिया है।