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पीएचडी का कॉमन एंट्रेंस टेस्ट अब नहीं
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 14 Apr 2014 03:39 AM IST
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प्रदेश नौ राज्य विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए अब पीएचडी का कॉमन एंट्रेंस टेस्ट नहीं कराए जाएंगे। सभी राज्य विश्वविद्यालय अपना एंट्रेंस टेस्ट कराके पीएचडी की सीटें भरेंगे।
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उच्च शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को उच्च शिक्षा परिषद से हरी झंडी मिल गई है। लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता (16 मई के बाद) हटने के बाद हर यूनिवर्सिटी को अपना एंट्रेंस टेस्ट कराके सीटें भरने के अधिकार दे दिए जाएंगे।
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लखनऊ और गोरखपुर को छोड़कर प्रदेश के नौ राज्य विश्वविद्यालयों में पीएचडी की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया वर्ष 2009 से ठप है। छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी में 44 सब्जेक्ट में पीएचडी होती है।
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इनकी 500 सीटें हर साल भरी जाती हैं लेकिन कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के चक्कर में पिछले पांच साल से पूरी प्रक्रिया रुकी है। ठीक यही हाल प्रदेश के आठ अन्य राज्य विश्वविद्यालयों के हैं।
फैजाबाद यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2011 में पीएचडी के कॉमन एंट्रेंस टेस्ट कराया था लेकिन सफल स्कॉलर के स्कोर कार्ड (मार्क्स) अभी तक नहीं उपलब्ध करा सके हैं।
इस प्रक्रिया में लखनऊ और गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने हिस्सा नहीं लिया और अपना एंट्रेंस टेस्ट कराके सीटें भर लीं। इसलिए संबंधित यूनिवर्सिटी का शिक्षा सत्र पटरी से नहीं उतर सका।
इन यूनिवर्सिटियों के रजिस्ट्रेशन ठप-कानपुर, झांसी, बरेली, फैजाबाद, जौनपुर, बीएचयू और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी, मेरठ, आगरा।