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मार्केट में नहीं हैं NCERT की किताबें
अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 18 Apr 2014 12:44 PM IST
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नोएडा के निजी स्कूलों में नया सत्र शुरू हो गया है, लेकिन बाजार से एनसीईआरटी की करीब 70 फीसदी किताबें गायब हैं।
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देखा जाता है कि हर साल किताबों की किल्लत होती है, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि कक्षा छह, नौ और 11वीं की एक भी किताब नहीं है। ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की तो किताबों की कमी के पीछे अच्छा मुनाफा और निजी प्रकाशकों द्वारा बाद में पेमेंट की सुविधा का खेल सामने आया।
शहर में बुक सेलर्स के पास एनसीईआरटी की कक्षा छह, नौ और 11वीं कक्षा की एक भी किताब नहीं है। वहीं अन्य कक्षाओं की भी कई किताबें नहीं हैं। ऐसे में छात्र और अभिभावक परेशान हैं।
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बुक सेलर्स का कहना है कि हर साल एनसीईआरटी की किताबों की मांग की तुलना में आपूर्ति कम रहती है। यहीं नहीं किताबों का स्टाक भी समय पर नहीं आता है।
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वहीं कुछ बुक सेलर्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एनसीईआरटी की किताबों में अच्छा मुनाफा नहीं है। जबकि निजी प्रकाशकों की किताबों से 30 फीसदी तक मुनाफा मिलता है।
क्या कहते हैं बुक सेलर
बुक सेलर एसोसिएशन के प्रवक्ता नीरज भार्गव का कहना है कि एनसीईआरटी की किताबों की मांग ज्यादा है और आपूर्ति कम है। इंडेन भरवाने को लेकर डिस्ट्रीब्यूटर्स का रोल भी ढिलाई वाला है। इसके अलावा एनसीईआरटी की किताबें दुकान पर आते ही पेमेंट करना होता है जबकि निजी प्रकाशक किताबें बिकने के बाद पेमेंट की सुविधा देते हैं। एनसीईआरटी की किताबों के लिए बुक सेलर से बैंक गारंटी रखवाकर बाद में पेमेंट की सुविधा दी जानी चाहिए।
परेशान छात्र
रॉकवुड स्कूल के छात्र रजत कहते हैं कि एनसीईआरटी की सभी किताबें बुक सेलर के पास नहीं मिलती हैं। लाइब्रेरी में भी मांग ज्यादा होने के कारण किताबें मिलनी मुश्किल होती हैं। वहीं आर्मी पब्लिक स्कूल की छात्रा शालिनी कहती हैं कि पूर्व छात्रों से किताब लेकर पढ़ाई करनी पड़ती है। इसके अलावा मैरी गोल्ड स्कूल के छात्र संदीप कहते हैं कि एनसीईआरटी की वेबसाइट पर किताबें विषय वार उपलब्ध हैं लेकिन इनको डाउनलोड करके प्रिंट आउट निकालने का खर्चा किताब की कीमत से कहीं अधिक है।
क्या कहते हैं स्कूल
रॉकवुड स्कूल के निदेशक सुनित टंडन कहते हैं कि आठवीं और इससे ऊपर की कक्षाओं में एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाती हैं। निजी प्रकाशकों की वहीं किताबें लगाई जाती हैं, जिनमें प्रैक्टिस के लिए न्यूमेरिकल और ऐसी ही अन्य सामग्री ज्यादा होती है।
मैरी गोल्ड स्कूल के प्रिंसिपल विक्रम शारदा कहते हैं लाइब्रेरी के लिए एनसीईआरटी की किताबों का पहले ही इंतजाम कर लिया जाता है। निजी प्रकाशक अच्छे कमीशन की बात करते हैं लेकिन इनके लोभ में न पड़ते हुए निजी प्रकाशकों की जरूरी किताबें ही लगाई जाती हैं।
बड़ा अंतर है दाम में
एनसीईआरटी की जिस किताब के दाम 50 रुपये हैं, वहीं उसी विषय और कक्षा की किताब निजी प्रकाशक से तकरीबन 200 रुपये में मिलती है।
नहीं हो सका संपर्क
पूरे मामले पर एनसीईआरटी का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन किताबों की उपलब्धता का विभाग देख रहे अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका।