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चंडीगढ़ के स्कूलों में मोहाली, पंचकूला की 'नो एंट्री'

Mon, 30 Mar 2015 09:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जीरकपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, जीरकपुर Updated Mon, 30 Mar 2015 09:02 AM IST
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no admission to panchkula, mohali children in chandigarh school

चंडीगढ़ का शिक्षा विभाग आगामी सत्र से राइट टू एजुकेशन (आरटीई) को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है। अब पहली से आठवीं क्लास तक प्रत्येक सेक्शन में 40 से अधिक बच्चों को दाखिला नहीं दिया जाएगा।

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स्टूडेंट्स की तादाद को देखते हुए शिक्षा विभाग ने चंडीगढ़ सेक्टरों के साथ लगते पंचकूला और मोहाली जिले के बच्चों की एंट्री पर रोक लगाने की तैयारी कर ली है। शिक्षा विभाग ने दाखिले में चंडीगढ़ निवासी बच्चों को ही तवज्जो देने का फैसला लिया है।
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इस फैसले से पंचूकला और मोहाली के सैकड़ों अभिभावकों में नाराजगी है। चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के डीईओ ने चंडीगढ़ के सभी 109 सरकारी स्कूलों में आरटीई लागू करने के निर्देश दे दिए हैं।
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स्कूल की सीमा से एक किलोमीटर के अंतर्गत के ही बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा। अगर क्लास में बच्चों की कमी रहती है तो इस दायरे को बढ़ाकर तीन किलोमीटर तक किया जाएगा।

पंजाब के सरकारी स्कूलों में चंडीगढ़ जैसी सुविधाएं नहीं

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पंजाब के सरकारी स्कूलों के बच्चों को चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों जैसा माहौल नहीं मिल पाता। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों के मुकाबले पंजाब के स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्टर की कमी आज भी देखने को मिलती है। इसके चलते ही पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में गिरावट आई है।

जीरकपुर में आज भी कई परिवार खेती पर निर्भर
जीरकपुर का अधिकतर क्षेत्र गांव से जुड़ा है। अधिकतर लोग आज भी खेती पर ही निर्भर हैं, जिनकी सालाना आय नाम मात्र है। वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों पर ही निर्भर रहते हैं।

अभिभावकों के सामने भविष्य संवारने की चुनौती
चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों द्वारा इसके आदेश जारी होने के बाद जीरकपुर के अभिभावकों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

यहां के जो अभिभावक बच्चों को चंडीगढ़ के निजी स्कूलों में नहीं पढ़ा पाते वे अपने बच्चों को इन सरकारी स्कूलों के अच्छे माहौल में शिक्षा प्राप्त करवाते हैं। लगभग 2 लाख की आबादी वाले जीरकपुर का मध्यम वर्ग चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों पर ही निर्भर है।

ये कहना है अधिकारियों का

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शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूलों से पहले सरकारी स्कूलों में आरटीई को पूरी तरफ फॉलो करना चाहता है। इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से प्रत्येक सेक्शन में बच्चों की संख्या 40 की जाएगी। ऐसे में पहली से आठवीं क्लास तक के दाखिले में चंडीगढ़ निवासी बच्चों को तवज्जो दी जाएगी। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में सीट खाली होने पर ही पंचकूला और मोहाली के बच्चों के एडजस्ट किया जाएगा।
- कमलेश कुमार भादू, डीपीआई (स्कूल) चंडीगढ़

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग को भी सरकारी स्कूलों में बाहरी बच्चों को दाखिला दिया जाना चाहिए, जबकि जीरकपुर तो पेरीफेरी के अधीन आता है।
-दलजीत सिंह चीमा, शिक्षामंत्री पंजाब

शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब सरकार के दावे हर स्तर पर फेल साबित हुए हैं। आज समाज का हर वर्ग सरकार द्वारा बनाई शिक्षा प्रणाली से खुश नहीं है। चंडीगढ़ द्वारा बाहरी राज्यों के बच्चों को दाखिला न देने के फैसले का खामियाजा जीरकपुर के अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है।
-हरबंस सिंह, कनवीनर, आम आदमी पार्टी, जीरकपुर

पंजाब के सरकारी स्कूलों की हालत दयनीय बनी हुई है। जहां पर आज भी इंफ्रास्ट्रक्चर नाम की चीज नहीं। जीरकपुर के अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में इसी कारण दाखिला दिलवाते थे।
- जसपाल सिंह, ब्लाक प्रेसीडेंट, कांग्रेस, डेराबस्सी

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