हॉस्टल किसी और का, रह कोई और रहा
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एलयू के हबीबुल्लाह हॉस्टल में एनसीसी की 63वीं बटालियन के
बड़ी संख्या में दस दिनों तक कैडेट्स को रोके जाने से यहां रहने वाले अंत:वासी स्टूडेंट परेशान हैं। उनका कहना कि एक ही हॉस्टल में इतने अधिक कैडेट्स को रोकने की बजाए इन्हें आसपास के हॉस्टल में रोका जाना चाहिए था।
स्टूडेंट का कहना कि यहां उन्हें पेयजल व शौचालय के लिए कतारें लगानी पड़ रही हैं। इससे उनका शेड्यूल बिगड़ रहा है।
दस
दिन तक चलने वाले इस वार्षिक कैंप के चलते हॉस्टल में फिलहाल नए स्टूडेंट
को अलॉटमेंट भी नहीं दिया जा रहा है।
इससे स्टूडेंट को अब इंतजार करना पड़
रहा है। फिलहाल स्टूडेंट परेशान हैं और इसकी शिकायत भी विवि प्रशासन से कर
रहे हैं। उधर, एलयू के एडिशनल चीफ प्रोवोस्ट प्रो. एनके पांडेय का कहना है
कि एनसीसी के कैंप के लिए खुला स्थान होना जरूरी है।
ऐसे में हबीबुल्लाह
हॉस्टल इसलिए चुना गया क्योंकि इसमें खुला स्थान बहुत अधिक है और इसी के
बगल में स्थित महमूदाबाद हॉस्टल में भी खुला स्थान अधिक है।
फिलहाल अगर
अन्त:वासी छात्रों को पेयजल व शौचालय की समस्याएं हो रही हैं तो हम
स्टूडेंट को आसपास के हॉस्टल में खाली पड़े कमरों में शिफ्ट करेंगे।