वाह बेटी! इंग्लैंड में रोशन कर दिया देश का नाम
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शिमला के न्यू शिमला की रहने वाली नीलोत्पल चौहान का चयन जेनेटिक इंजीनियरिंग के लिए इंग्लैंड की मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में हुआ है। विवि से नीलोत्पल मास्टर डिग्री करेंगी। पिता का दावा है कि नीलोत्पल मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से जेनेटिक इंजीनियरिंग करने वाली प्रदेश की पहली छात्रा है।
पिता प्रोफेसर डॉ. ज्ञान चौहान ने बताया कि विवि में दस सीटें हैं, इसमें से आठ सीटें इंग्लैड के छात्रों के लिए आरक्षित रहती हैं, जबकि दो सीटें शेष देशों के छात्रों के लिए हैं। इन्हीं दो में से एक सीट पर उनकी बेटी का चयन हुआ है। 14 सितंबर को नीलोत्पल मैनचेस्टर जाएंगी। नीलोत्पल चौहान 10वीं तक चेल्सी स्कूल में पढ़ीं और 12वीं की परीक्षा डीएवी से पास की।
क्या है जेनेटिक इंजीनियरिंग
इसके बाद सीपीएमटी का टेस्ट दिया और एमबीबीएस में चयन हुआ लेकिन एमबीबीएस की जगह नीलोत्पल ने बीटेक करने का निर्णय लिया। एसआरएम यूनिवर्सिटी चेन्नई में पढ़ाई के दौरान उन्होंने जेनेटिक काउंसलिंग में करियर बनाने का फैसला लिया। इसकी तैयारियां शुरू कर दीं। कड़े परिश्रम के बाद आखिर लक्ष्य हासिल करने में कामयाब हुईं।
जेनेटिक इंजीनियरिंग विज्ञान की एक अत्याधुनिक ब्रांच है। इसमें सजीव प्राणियों के डीएनए कोड में मौजूद जेनेटिक को अत्याधुनिक तकनीक के जरिये परिवर्तित किया जाता है। नीलोत्पल के पिता प्रोफेसर डॉ. ज्ञान चौहान आईजीएमसी अस्पताल में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की कामयाबी पर गर्व है। उनकी यह इकलौती संतान है।