इस कॉलेज में नदी का भी हो सकता है 'दाखिला'
हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड के कॉलेजों में मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जा रहा है। ऐसे में सैकड़ों छात्र-छात्राएं दाखिले से वंचित रह जाएंगे।
इन्हीं की चिंता करते हुए शासन ने राजधानी देहरादून में एक नया कॉलेज खोलने का फैसला लिया है। लेकिन इसके लिए फिलहाल जिस जगह का चयन किया गया है वह नदी के किनारे है।
पिछले दिनों हुई बारिश में नदी का पानी प्रस्तावित कॉलेज के भवन तक आ गया था। यदि तेज बारिश होती है तो इस कालेज में नदी का भी दाखिला हो सकता है।
खतरों से खेलने के लिए भी तैयार रहें
रायपुर में बीए और बीकॉम में दाखिला लेना चाहते हैं तो खतरों से खेलने के लिए भी तैयार रहें। इस बरसात में सौंग नदी ने कॉलेज कैंपस के लिए चुनी गई किसान एवं फल सब्जी संग्रह की इमारत में दस्तक दे दी है।
नदी और इस इमारत के बीच सिर्फ एक पुश्ता है। तेज बारिश के कारण नदी में उफान आने पर पानी कॉलेज में आ सकता है। ऐसे में छात्रों के लिए मुसीबत बढ़नी तय है।
हालांकि ऑन रोड होने से कॉलेज तक पहुंचना थोड़ा विद्यार्थियों के लिए आसान रहेगा। सरकार ने बीते साल रायपुर में राजकीय डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा की थी। एक साल तक इसकी जमीन खोजी गई, लेकिन नहीं मिली।
भवन के ठीक पीछे सौंग नदी बहती है
इस वर्ष हाईकोर्ट के फैसले के बाद कॉलेज के लिए किराए की बिल्डिंग की खोज शुरू हुई जो रायपुर के बझेत गांव स्थित किसान फल एवं सब्जी संग्रह केंद्र की इमारत पर जाकर खत्म हुई।
लेकिन इस भवन के ठीक पीछे सौंग नदी बहती है। इसका पानी 14 अगस्त की रात पुश्ता पार कर मंडी के परिसर तक आ गया था। बराबर के खाली प्लॉट में उफान के निशान हकीकत बयां कर रहे हैं।
महज 15 फीट के अंतर पर तेज रफ्तार पानी और कॉलेज के बीच सिर्फ एक पुश्ता है। स्थानीय लोगों को डर है कि कहीं नदी का पानी कॉलेज परिसर तक न पहुंच जाए।
कॉलेज में 20 अगस्त से नए सत्र के लिए दाखिला प्रक्रिया शुरू होनी है। प्राचार्य डॉ. अंजू अग्रवाल का कहना है कि इमारत सुरक्षित है। साफ-सफाई कराई जा रही है।
26 तक जमा होंगे फार्म
रायपुर कॉलेज में दाखिला प्रक्रिया 20 अगस्त से शुरू होगी। प्राचार्य डॉ. अंजू अग्रवाल के मुताबिक 26 अगस्त तक आवेदन जमा कराए जा सकते हैं। प्रॉस्पेक्टस 25 रुपए में उपलब्ध है।
घंटाघर से 14 किमी दूर
शहर का कोई छात्र दाखिला लेता है तो उसे लंबा सफर करना होगा। पहले घंटाघर से रायपुर तक सिटी बस, इसके बाद सिर्फ मैक्सी कैब से पहुंचा जा सकता है। घंटाघर से नए कॉलेज की दूरी करीब 14 किलोमीटर है।
सुविधाएं और सफाई की कमी
कॉलेज के लिए चुनी गई इमारत की ऊपरी मंजिल पर सिर्फ एक टॉयलेट है, जो खस्ताहाल है। इमारत में छह कमरे हैं, चार नीचे और दो ऊपर।
इनमें कक्षाओं के साथ प्रिंसिपल ऑफिस चलना है और प्रशासनिक कार्यालय भी। चुनाव होता है तो छात्रसंघ भवन के लिए भी कमरा चाहिए। कॉलेज में बीकॉम की 120 और बीए की 280 सीटें मिलाकर कुल 400 छात्रों के लिए जगह चाहिए होगी।