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तो नहीं चल पाएंगी स्कूल बसें

Sun, 27 Apr 2014 10:17 AM IST
Updated Sun, 27 Apr 2014 10:17 AM IST
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New rules to come for school buses

सरकार की सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी इस वित्त वर्ष से लागू करने की तैयारी

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है। इसलिए कहा गया है कि एक अप्रैल के बाद स्कूल प्रबंधन बच्चों को लाने-ले जाने के लिए कोई भी वाहन खरीदता है तो उसमें जीपीएस का होना जरूरी है।

मौजूदा स्थिति में गुड़गांव के ज्यादातर स्कूल की बसों में जीपीएस नहीं है। नई पॉलिसी के तहत स्कूल प्रबंधन को अपने बस ड्राइवरों की तीन वर्ष में कम से कम एक बार हेल्थ चेकअप करानी होगी। जबकि स्कूलों में बस चालक स्थाई नहीं होते। इसलिए उन्हें हर कुछ दिनों के बाद बदल दिया जाता है।

ऐसे में शायद ही किसी स्कूल के चालक की स्वास्थ्य जांच हो सके। गुड़गांव के स्कूल प्रबंधन बसों के रंग-रोगन एवं उसमें उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे में नए नियम के अनुसार बसों को चलने देना गुड़गांव प्रशासन के लिए चुनौती भरा होगा।

स्कूल बसों के लिए नई नियामावली

New rules to come for school buses
स्कूल बस या वाहन पीले रंग में होगें, इसपर 254 मिलीमीटर चौड़ी नीले रंग की पट़टी खिड़की से नीचे होगी, वाहन पर सामने की तरफ सफेद रिफलेक्टिव टेप होना अनिवार्य है, पीछे लाल रंग की रिफ्लेक्टर, वाहनों में स्पीड गर्वनर मानक एआईएस:018 के अनुसार होना चाहिए, स्पीड गर्वनर हरियाणा परिवहन आयुक्त कार्यालय से स्वीकृत डीलर व निर्माता द्वारा लगाया गया होना चाहिए।

इसके साथ ही स्कूल बस में आगे और पीछे स्कूल बस लिखा होना जरूरी है, बस किराये पर ली गई है तो उसपर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए, वाहन में फिटनैस प्रमाणपत्र और इंश्योरेंस प्रमाणपत्र भी होना चाहिए, बसों में प्रशिक्षित, अनुभवी तथा अच्छे स्वाभाव के चालक, अटेंडेंट या कंडक्टर हों, स्कूल बस के पास परमिट होनी चाहिए, शहर में स्कूल बस या वाहन 50 किमी प्रति घंटा की रफतार से ज्यादा स्पीड रखने की अनुमति नहीं होगी।

स्कूल तथा शिक्षण संस्थाओं के पास चारदीवारी के अंदर पार्किंग क्षेत्र होना चाहिए, वाहनों में फस्ट एड बॉक्स और फायर एक्सटिंग्युशर नियमों के मुताबिक होना चाहिए, स्कूल बस और वाहन में स्कूल का नाम, रूट और समय का बोर्ड लगा होना चाहिए, बस में वाहन मालिक तथा पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर लिखा होना चाहिए।

परिवहन विभाग द्वारा आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में कंडक्टर और ड्राइवरों को तीन वर्ष में एक बार हिस्सा लेना होगा, सभी वाहन चालकों का तीन वर्ष में एक बार जिला सिविल सर्जन द्वारा मेडिकल फिटनेस होना चाहिए, चालकों और कंडक्टरों को वर्दी में और उसपर नेम प्लेट, लाइसेंस नंबर अनिवार्य है।
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स्कूल बसों पर नजर रखने को बनेगी कमेटी

New rules to come for school buses

परिवहन विभाग की आयुक्त सुमिता मिश्रा के निर्देशानुसार बसों पर नजर रखने को राज्य, जिला और उप-जिला स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी।

प्रदेश स्तर पर कमेटी कमेटी के चेयरमैन परिवहन विभाग के प्रधान सचिव होंगें, जबकि परिवहन आयुक्त, आबकारी एवं कराधान आयुक्त, राज्य परिवहन विभाग के महानिदेशक, पुलिस महानिदेशक, उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक, सेकेंडरी शिक्षा विभाग के महानिदेशक और प्राथमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक कमेटी के सदस्य बनाए जाएंगे।

जिला स्तरीय कमेटी में चेयरमैन  उपायक्त होंगें। जबकि पुलिस अधीक्षक, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के सचिव, हरियाणा रोडवेज के महाप्रबंधक और जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगें। यह कमेटी जिला में स्कूल बसों का निरीक्षण करेंगी। प्रत्येक स्कूल की प्रत्येक बस का निरीक्षण वर्ष में कम से कम एक बार जरूर किया जाएगा। यह कमेटी तीन माह में एक बार बैठक करेगी।

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