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डीसीएफ नहीं भरा तो जाएगी स्कूल की मान्यता
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 28 Dec 2013 01:50 AM IST
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एक क्लिक पर स्कूल के बारे में पूरी सूचना देने की योजना में जो संस्थान लापरवाही बरत रहे हैं, चार जनवरी तक डाटा उपलब्ध न कराए जाने पर उनकी मान्यता रदद तक की जा सकती है।
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एकीकृत जिला शैक्षिक सूचना प्रणाली (यू-डायस) के लिए विद्यालयों को डीसीएफ (डाटा कैप्चर फॉर्मेट) भरना है, जिसमें उन्हें स्कूल की पूरी जानकारी उपलब्ध करानी है लेकिन सैकड़ों विद्यालय ऐसे हैं।
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जिन्होंने अब तक डीसीएफ नहीं भरा है। ऐसे में अब सूचना उपलब्ध नहीं कराने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
देश भर में शैक्षिक सुधार के लिए स्कूलों का डाटा इकट्ठा किया जाता है। अब तक एजूकेशन मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम और सेकेंडरी एजुकेशनल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम के जरिए स्कूलों से संबंधित रिकॉर्ड मांगे जाते थे।
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अब दोनों यूनिटों को मिलाकर एकीकृत जिला शैक्षिक सूचना प्रणाली (यू-डायस) का नाम दिया गया है। इसमें स्कूल का नाम, बच्चों, शिक्षकों की संख्या, कमरे, चारदीवारी, शौचालय व हैंडपंप आदि से संबंधित जानकारी शामिल होती है।
इन जानकारियों को यू-डायस में अपलोड किया जाता है। इसके बाद एक क्लिक के साथ ही स्कूल से संबंधित पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है।
लेकिन विद्यालयों की ओर से जानकारी नहीं देने के कारण डाटा कलेक्शन का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में चार जनवरी तक सूचनाएं नहीं दी गईं तो विद्यालयों की मान्यता तक रदद की जा सकती है।
इन विद्यालयों को भरना है डीसीएफ
राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय संगठन, जवाहर नवोदय विद्यालय, संस्कृत विद्यालय, समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित आश्रम पद्धति विद्यालय, मकतब और मदरसे, कक्षा एक से 12 तक के सभी विद्यालय चाहे किसी बोर्ड के हों।
डीसीएफ से प्राप्त सूचना के आधार पर तैयार डाटाबेस का उपयोग शैक्षिक प्रगति के सूचकांकों की गणना करने में किया जाता है।
इस डाटा के आधार पर विभिन्न शैक्षिक योजनाओं जैसे- राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, सर्व शिक्षा अभियान आदि के तहत आधारभूत आवश्यकताओं, सामुदायिक सहभागिता आदि के लिए बजट आवंटित किया जाता है।