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डॉक्टर और नर्स के पदों पर होगी बंपर भर्ती
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 15 May 2014 10:36 PM IST
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दिल्ली सरकार ने दावा किया कि अन्य राज्यों की तुलना में राजधानी में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर है। साथ ही माना कि इसका अर्थ यह नहीं है कि जनसंख्या से हिसाब से यह पर्याप्त है।
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सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष उक्त तर्क रखते हुए बताया कि राजधानीवासियों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए 1002 डॉक्टरों की भर्ती करने का निर्णय किया है। इसके अलावा जल्द ही 2199 नर्सो की भी भर्ती की जाएगी।
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मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सचिव एससीएल दास ने शपथपत्र सहित बताया कि सरकार लोगों को उचित चिकित्सा न मिलने पर चिंतित है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए गए है और इसके लिए तीन प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।
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इस कड़ी में सर्वप्रथम तय किया गया है कि कुशल मैनपावर को बढ़ाया जाए जिसमें डाक्टर व नर्सो की भर्ती शामिल है। इसके बाद उपयोग होने वाली एवाओं की उपलब्धता, डिस्पोजेबल चिकित्सा उपकरण का प्रबंध करना है।
उन्होंने कहा इसके बाद बिल्डिंग सहित बुनियादी ढांचे को बनाना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कुल बजट का 10 प्रतिशत चिकित्सा पर खर्च किया जा रहा है जबकि देशभर में यह 4.15 प्रतिशत ही है।
उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में दिल्ली बेहतर है लेकिन हम यह नहीं कह रहे कि यह पर्याप्त है। इसी के ध्यानार्थ संघ लोक सेवा आयोग को 679 डॉक्टरों व 323 विशेषज्ञों की भर्ती का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार 2199 विशेष प्रशिक्षित नर्सों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी की जा रही है। इसके लिए दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को आग्रह भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार का पूरा प्रयास है कि लोग मैन पावर के कारण स्वास्थ्य से वंचित न हो। उन्होंने माना कि सत्यवती राजा हरीश चंद्र अस्पताल व महाराजा बाल्मीकि अस्पताल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
हाईकोर्ट खंडपीठ नरेला निवासी विकास सैनी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचि ने आरोप लगाया है कि नरैला औद्योगिक क्षेत्र स्थित राजा हरिशचंद्र अस्पताल में न तो दिल के मरीजों के इलाज की सुविधा और न ही आपातकालीन सुविधा है।
याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार कानून के तहल मिले जानकारी का हवाला देते हुए हाईकोर्ट को दिल की मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं होने से पिछले पांच साल में 15 मारीजों की मौत हो गई। याचिकाककर्ता विकास ने खुद को पीड़ित बताते हुए कहा है कि अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं होने से दूसरे अस्पताल ले जाने के दौरान उनके पिता की मौत हो गई।
याचिका के अनुसार अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने सूचना अधिकार कानून के तहत बताया कि अस्पताल में दिल के मरीज के इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं है। साथ ही कहा है कि इस अस्पताल में आपातकालीन स्थिति में इलाज की सुविधा नहीं है। इससे इलाके के लोगों को परेशानियों का समाना करना पड़ता है।