दाखिले की मारामारी फिर भी 40 फीसदी सीटें खाली

सचिन त्रिपाठी/लखनऊ Updated Thu, 21 Nov 2013 12:23 AM IST
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राजकीय आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) में दाखिला लेने का अधिकार अब प्रधानाचार्यों को दे दिया गया है।
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इसकी वजह पांच सूचियां निकलने के बाद भी सीटों का न भर पाना है।
इस साल प्रदेश स्तर पर मेरिट बनाने के फैसले के बाद यह नौबत आई है।
हालत यह है कि हर साल राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए मारामारी मचती है लेकिन वहां भी करीब 40 फीसदी सीटें खाली हैं।

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जो एडमिशन हुए भी हैं उनमें काफी अभ्यर्थी गैरहाजिर चल रहे हैं।

राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में 760 सीटें हैं। पांच सूची जारी होने के बाद भी 136 सीटें खाली पड़ी हुई हैं।

दरअसल, इस साल से आईटीआई में कई बदलाव किए गए। पहली बार सेमेस्टर प्रणाली लागू हुई और जिला स्तर के बाद प्रदेश स्तर की मेरिट बनाई गई।

आईटीआई के ज्यादातर कोर्सों की अर्हता दसवीं है। दसवीं पास अभ्यर्थियों की उम्र इतनी नहीं होती कि अभिभावक उन्हें घर से दूर अकेले पढ़ने भेज दें।

आईटीआई में हॉस्टल व्यवस्था काफी पहले समाप्त हो चुकी है। इस नाते एडमिशन लेने में अभ्यर्थियों की दिलचस्पी और कम हुई।

प्रदेश स्तर पर मेरिट बनने के कारण सूची में अभ्यर्थियों के नाम तो आए लेकिन अपने जनपद से दूर एडमिशन मिलने के कारण उन्होंने दाखिला नहीं लिया।

प्रवेश मेरिट के जरिये ही दिया जाना था, ऐसे में एक के बाद एक पांच सूचियां निकाली गईं। इसके बावजूद सीटें नहीं भरी।

अब प्रधानाचार्यों को अधिकार दिया गया है कि वे अपने यहां की सीटें हाईस्कूल की मेरिट के आधार पर भर लें।

सीटें 60 हजार, दावेदार सात लाख
आईटीआई में एडमिशन का कितना क्रेज है, यह इससे पता चलता है कि राजकीय आईटीआई की 60 हजार सीटों के मुकाबले करीब सात लाख अभ्यर्थी हर साल प्रवेश परीक्षा देते हैं।

साथ ही निजी आईटीआई में भी करीब 90 हजार सीटें हैं लेकिन राजकीय में दाखिला न मिलने पर ही इनकी ओर अभ्यर्थी रुख करते हैं। निजी आईटीआई की काफी सीटें हर साल खाली पड़ी रहती हैं।

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