क्या आपका बच्चा भी है गणित में कमजोर, जानिए चौंकाने वाली वजह
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अगर आपका बच्चा मैथ में कमजोर है तो इसके पीछे के ये कारण जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। एनसीईआरटी के नेशनल अचीवमेंट सर्वे में इस संबंध में चौकाने वाली बातें सामने आई हैं।
दरअसल, सर्वे से पता चला कि टीवी देखने वाले बच्चों की अपेक्षा खेलने-कूदने वाले बच्चे गणित में उस्ताद होते हैं। इसके अलावा, दो या अधिक भाई-बहन वाले बच्चे गणित के सवाल ज्यादा आसानी से हल कर लेते हैं, जबकि इकलौते बच्चे मैथ में कमजोर होते हैं।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ओर से देशभर में किए गए सर्वेक्षण में कई रोचक बातें सामने आईं। सर्वे में जो सबसे प्रमुख बात निकलकर आई है वह यह है कि जो बच्चे ज्यादा खेलते हैं, वह मैथ्स में अच्छे होते हैं।
जो बच्चे टीवी ज्यादा देखते हैं या अकेले होते हैं वे गणित में कमजोर होते हैं। सर्वे में पता चला कि चार या चार से अधिक भाई-बहन वाले बच्चों का गणित में औसत स्कोर 32.9 प्रतिशत है, जबकि एक भाई या बहन वाले बच्चे का औसत अपेक्षाकृत कम है।
ऐसे हुआ सर्वेक्षण
जिन बच्चों के पास ज्यादा किताबें होती हैं, उनके पढ़ने की क्षमता अधिक पाई गई और उनके मैथ्स के मार्क्स में 2.5 प्रतिशत का सुधार देखा गया। किताबों से सोशल साइंस और साइंस के मार्क्स में इजाफा देखा गया।
सर्वे में पाया गया कि जिन बच्चों के पास 25 या इससे ज्यादा किताबें थीं, उनकी रीडिंग स्किल में 50.8 प्रतिशत स्कोर था। जिनके घर पर किताबें नहीं थीं, उन्होंने 42.6 प्रतिशत स्कोर किया।
एनसीईआरटी के सर्वे में मैथ्स, साइंस, लैंग्वेज सीखने और सोशल साइंस की क्षमता परखी गई। सर्वे में 6722 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के 24,486 शिक्षकों और 1,88,647 बच्चों से फीडबैक लिया गया।
सर्वे 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया गया। सर्वे का मकसद बच्चों की पढ़ने और सीखने की क्षमता के बारे में जानकारी हासिल करना था। एनसीईआरटी ने राज्यवार भी डाटा जारी किया है।
केवल उत्तराखंड के लिए
- लैंग्वेज पढ़ने के मामले में उत्तराखंड के बच्चे राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले काफी नीचे पाए गए। ब्वॉयज और गर्ल्स का स्कोर राष्ट्रीय के तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम है।
- गणित के सवाल हल करने का राष्ट्रीय प्रतिशत 54 था, लेकिन उत्तराखंड के बच्चों का 49 है। ज्योमेट्री का राष्ट्रीय प्रतिशत 52, उत्तराखंड का प्रतिशत 49, मेजरमेंट का राष्ट्रीय प्रतिशत 47 और राज्य का प्रतिशत 42 जबकि नंबर सिस्टम का राष्ट्रीय प्रतिशत 51 और राज्य का प्रतिशत 46 प्रतिशत है।
- सोशल साइंस और साइंस में भी उत्तराखंड के बच्चों का स्कोर जहां 50 प्रतिशत रहा वहीं राष्ट्रीय स्कोर प्रतिशत 58 है।