फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   national law university

तारीखों में उलझा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय

Mon, 25 Aug 2014 04:16 PM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 25 Aug 2014 04:16 PM IST
विज्ञापन
national law university

उत्तराखंड की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में शैक्षिक सत्र 2014-15 से कक्षाएं शुरू होनी थी लेकिन सरकार अभी तक इसे जमीन भी मुहैया नहीं करा सकी है।

विज्ञापन


2011 में शुरू हुई विधि विश्वविद्यालय बनाने की कवायद
विधि विश्वविद्यालय बैठकों, फाइलों और पत्रों की तारीखों में उलझ कर रह गया है। जबकि इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश और कुलाध्यक्ष सुप्रीमकोर्ट के न्यायमूर्ति होंगे। नैनीताल जिले के भवानी में विधि विश्वविद्यालय बनाने की कवायद 2011 में शुरू हुई थी।
विज्ञापन


विधि विश्वविद्यालय में इस साल से सत्र शुरू होना था। इसके लिए निदेशक उत्तराखंड न्यायिक एवं विधिक अकादमी और पंत नगर विश्वविद्यालय से समन्वय स्थापित कर अंतरिम व्यवस्था के रूप में कुछ शैक्षणिक कक्ष विश्वविद्यालय को आवंटित किए जाने थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इतना ही नहीं शुरू में पंत नगर विश्वविद्यालय से विधि विश्वविद्यालय चलाने केलिए जमीन मांगी गई थी लेकिन प्रबंध परिषद की बैठक में जमीन न देने का फैसला हुआ और पंत नगर विश्वविद्यालय ने भूमि उपलब्ध कराने में असमर्थता जता दी। पंत नगर विश्वविद्यालय ने फैसला लिया कि कोई भी भूमि कृषि के अतिरिक्त अन्य किसी प्रयोजन केलिए न दी जाए।

विधि विश्वविद्यालय के लिए भवानी में दस एकड़ जमीन जिला प्रशासन को उपलब्ध करानी थी। जबकि जिलाधिकारी की ओर से बार-बार यही कहा जा रहा है कि इतनी जमीन उपलब्ध नहीं है। जबकि न्यायिक एवं विधिक अकादमी की ओर से बैठकों में जमीन उपलब्ध होने की जानकारी दी जा रही है।

विश्वविद्यालय को जमीन मुहैया नहीं हुई

पिछले दिनों मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक कमेटी गठित की है जो जल्द जमीन की उपलब्ध कराएगी। जिला प्रशासन ने एक ही स्थान पर दस एकड़ भूमि उपलब्ध कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। शासन की ओर से जमीन को लेकर आलाधिकारियों के दर्जनों पत्र इधर से उधर आए गए हैं लेकिन विश्वविद्यालय को जमीन मुहैया नहीं हुई है।


सरकार विधि विश्वविद्यालय को अभी तक जमीन तो मुहैया नहीं करा सकी है लेकिन उसकी मांग है कि हैदराबाद और बंगलुरू स्थिति विधि विश्वविद्यालयों की तर्ज पर उत्तराखंड के छात्रों के लिए दस फीसदी सीटें आरक्षित की जाएं। सरकार ने इसका पैटर्न तलाशने को कहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed