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इंजीनियरिंग कॉलेजों को झटका, ऐसे खुलेगी पोल
अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 20 Mar 2014 01:18 PM IST
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अपने क्षेत्र में सबसे दमदार इंजीनियरिंग कॉलेज का दम भरने वाले संस्थानों को अब आइना दिखाने की तैयारी हो गई है।
लिहाजा छात्र एडमिशन से पहले कॉलेज का स्तर जान पाएंगे। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) या नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन (एनबीए) से सर्टिफिकेट लेना जरूरी कर दिया है।
इसके अलावा छह साल या उससे पुराने इंजीनियरिंग कॉलेजों को बिना इस सर्टिफिकेट के यूनिवर्सिटी मान्यता नहीं दे पाएंगी। दरअसल, यूजीसी ने टेक्निकल एजुकेशन रेगुलेशन-2014 में नैक और एनबीए की अनिवार्यता लागू कर दी है।
यह भी पढ़ें: डीटीयू में एमबीए की पहली कटऑफ जारी
नैक अब तक सिर्फ परंपरागत कॉलेजों के लिए ही जरूरी था जबकि एनबीए सर्टिफिकेट लेना कॉलेजों की इच्छा पर निर्भर था। अब इन दोनों में से संबंधित प्रोग्राम के लिए कोई भी एक सर्टिफिकेट जरूरी कर दिया गया है।
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यूजीसी ने टेक्निकल एजुकेशन पर पहली बार रेगुलेशन तैयार करते हुए सभी यूनिवर्सिटी को ये निर्देश दिए हैं कि बिना नैक/एनबीए के सालाना मान्यता प्रक्रिया पूरी नहीं की जाएगी। साथ ही इस सर्टिफिकेट को दिलाने की जिम्मेदारी भी संबंधित यूनिवर्सिटी की होगी, जिसकी प्रक्रिया अगले छह महीने के अंदर पूरी करनी है।
नैक मूल्यांकन के ग्रेड के आधार पर कॉलेज का स्तर पता चलता है। छात्रों को उच्च शिक्षा में जाने और नौकरी में इसका प्रभाव पड़ता है। विभिन्न एजेंसियों से रिसर्च व अन्य कार्यक्रमों के लिए मिलने वाली फंडिंग में भी ये ग्रेड मददगार होता है।
ऐसे मिलेगा नैक ग्रेड
नैक काउंसिल सात सिद्धांतों के आधार पर कॉलेजों को ए, बी और सी ग्रेड देती है। इसमें संबंधित संस्थान के पाठ्यक्रम पहलु, शिक्षण व मूल्यांकन पद्धति, अनुसंधान-परामर्श व विस्तार कार्यक्रम, बुनियादी ढांचा व संसाधन, छात्र समर्थित व विकास गतिविधियां, प्रशासन व नेतृत्व और नवाचार के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। ग्रेड से कॉलेज का स्तर तय होगा।
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लिहाजा छात्र एडमिशन से पहले कॉलेज का स्तर जान पाएंगे। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) या नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन (एनबीए) से सर्टिफिकेट लेना जरूरी कर दिया है।
इसके अलावा छह साल या उससे पुराने इंजीनियरिंग कॉलेजों को बिना इस सर्टिफिकेट के यूनिवर्सिटी मान्यता नहीं दे पाएंगी। दरअसल, यूजीसी ने टेक्निकल एजुकेशन रेगुलेशन-2014 में नैक और एनबीए की अनिवार्यता लागू कर दी है।
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नैक अब तक सिर्फ परंपरागत कॉलेजों के लिए ही जरूरी था जबकि एनबीए सर्टिफिकेट लेना कॉलेजों की इच्छा पर निर्भर था। अब इन दोनों में से संबंधित प्रोग्राम के लिए कोई भी एक सर्टिफिकेट जरूरी कर दिया गया है।
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यूजीसी ने टेक्निकल एजुकेशन पर पहली बार रेगुलेशन तैयार करते हुए सभी यूनिवर्सिटी को ये निर्देश दिए हैं कि बिना नैक/एनबीए के सालाना मान्यता प्रक्रिया पूरी नहीं की जाएगी। साथ ही इस सर्टिफिकेट को दिलाने की जिम्मेदारी भी संबंधित यूनिवर्सिटी की होगी, जिसकी प्रक्रिया अगले छह महीने के अंदर पूरी करनी है।
नैक मूल्यांकन के ग्रेड के आधार पर कॉलेज का स्तर पता चलता है। छात्रों को उच्च शिक्षा में जाने और नौकरी में इसका प्रभाव पड़ता है। विभिन्न एजेंसियों से रिसर्च व अन्य कार्यक्रमों के लिए मिलने वाली फंडिंग में भी ये ग्रेड मददगार होता है।
ऐसे मिलेगा नैक ग्रेड
नैक काउंसिल सात सिद्धांतों के आधार पर कॉलेजों को ए, बी और सी ग्रेड देती है। इसमें संबंधित संस्थान के पाठ्यक्रम पहलु, शिक्षण व मूल्यांकन पद्धति, अनुसंधान-परामर्श व विस्तार कार्यक्रम, बुनियादी ढांचा व संसाधन, छात्र समर्थित व विकास गतिविधियां, प्रशासन व नेतृत्व और नवाचार के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। ग्रेड से कॉलेज का स्तर तय होगा।