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डायनासोर में छिपा ‘इंटेलीजेंट रोबोट’ का राज

Fri, 29 Nov 2013 01:22 AM IST
अतुल भारद्वाज/लखनऊ
अतुल भारद्वाज/लखनऊ Updated Fri, 29 Nov 2013 01:22 AM IST
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mystery of intelligent robot hidden in dynasaur

ऐसा रोबोट जो इंसान की तरह फिजिकल एक्टिविटी कर सके। तेजी से सीढ़ियां चढ़ जाए। आसानी से दौड़ सके। ऐसे इंटेलीजेंट रोबोट बनाने के लिए जरूरी राज डायनासोर के कंकाल में छिपे हुए हैं।

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रोबोटिक्स के लिए दुनिया भर में काम कर रहे वैज्ञानिकों को यह रास्ता डायनासोर ने दिखाया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक एक जानवर या पौधे के कंकाल का ढांचा कैसे बनता है। यह पता चलने पर इंटेलीजेंट रोबोट बनाने में मदद मिलेगी।
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बीरबल साहनी पुरावनस्पति संस्थान (बीएसआईपी) में बृहस्पतिवार से शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस में पंजाब यूनिवर्सिटी के एमरेटस प्रोफेसर और पेलियॉनटोलोजिस्ट डॉ. अशोक साहनी ने यह जानकारी दी।
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कांफ्रेंस में अपने प्रेजेंटेशन में उन्होंने बताया कि डायनासोर के कंकाल की बनावट माइक्रोमीटर और नैनोमीटर साइज के क्रिस्टल से हुई थी। कई पौधों और जानवरों में इस तरह की संरचना पाई जाती है।

इससे गुरुत्व केंद्र के सही बिंदु पर रहने से जरूरी स्थिरता मिलती है। केंद्र के सही बिंदु पर रहने से जरूरी स्थिरता मिलती थी। कई बार पौधे अगर 100-110 मीटर होने के बाद आगे नहीं बढ़ पाते।

इसकी वजह यही क्रिस्टल होते हैं। मीडिया के एक सवाल के जवाब में प्रो. साहनी ने बताया कि यह भविष्य की इंजीनियरिंग है। इसे बायोमिमेटिक्स कहते हैं।

इसमें इस बात की छानबीन की जा रही है कि एक कंकाल कैसे बनता है। इससे काफी हद तक रोबोट की शेप बनाने में मदद मिली है। अभी इसमें काफी काम होना बाकी है।

इससे हम भविष्य का रोबोट बना सकेंगे जो आदमी की तरह काम कर सके। हालांकि, इसके लिए अभी कोमल ऊतकों के साथ कठोर ऊतकों का अध्ययन किए जाने की जरूरत है।

जीवाश्म के अध्ययन पर उन्होंने कहा कि इससे ही पता चला है कि इन भीमकाय जानवरों की आंखें कैल्शियम कार्बोनेट के खनिज रूप कैलसाइट से बनी थीं।

रोडेंट के नुकीले दांत खनिज एपेटाइट से बने हुए पाए गए हैं। यह क्रिस्टलों के विभिन्न गुणों से संभव हुआ।

इससे पूर्व पैलियोबॉटनिकल सोसाइटी और बीएसआईपी के पादप तथा पृथ्वी विज्ञान में आधुनिक विकास पर दो दिवसीय कांफ्रेंस का शुभारंभ प्रसिद्ध पेलियॉनटोलोजिस्ट प्रो. अशोक साहनी और जेएनयू के प्रो. पीएस रामाकृष्णन ने किया।


इसमें विशेषज्ञों ने पुरावनस्पति के क्षेत्र में आधुनिक शोध किए जाने पर जोर दिया। इस दौरान सोसाइटी के सचिव डॉ. आरएस सिंह ने निदेशक प्रो. सुनील बाजपेई, प्रो. सुबीर बेरा और प्रो. मुथूचेलियन को मानद फैलोशिप दिए जाने की घोषणा की।

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