{"_id":"daddbb88027ed2208738e174b5bf9a45","slug":"multi-talented-students-participating-in-sanskrit-mahotsav","type":"story","status":"publish","title_hn":"शास्त्रों के जानकार के साथ ही खेलों के भी महारथी","category":{"title":"Campus Archives","title_hn":"कैंपस आर्काइव","slug":"campus-archives"}}
शास्त्रों के जानकार के साथ ही खेलों के भी महारथी
नीरज/लखनऊ
Updated Sun, 27 Oct 2013 02:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ये वेद और शास्त्रों के जानकार हैं और म्यूजिकल योगासन के भी। जितनी मजबूत पकड़ इनकी देववाणी संस्कृत पर है, उतनी ही अखाड़े में कुश्ती के समय प्रतिद्वंद्वियों पर भी।
विज्ञापन
जितनी समझदारी से ये आम लोगों को संस्कृत के श्लोक और ऋचाएं समझाते हैं, उतनी ही सूझबूझ से शतरंज के मोहरों पर हाथ आजमा कर बाजी पलटने का माद्दा रखते हैं।
विज्ञापन
यहां बात हो रही है राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मानित विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के उन युवाओं की, जो पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों में भी अव्वल हैं।
विज्ञापन
स्टूडेंट्स की कम अटेंडेंस पर जाएगी स्कूली की मान्यता
विशाल खंड गोमती नगर स्थित संस्थान परिसर में चल रहे छठे राष्ट्रीय संस्कृत युवा महोत्सव के दौरान ‘अमर उजाला’ ने ऐसे ही छात्रों से बातचीत की, जिन्होंने खेलकूद के जरिए अभिभावकों, शिक्षकों व संस्थान का नाम रोशन किया।
खेत-खलिहानों से मलेशिया तक
शुभम आर्या ने सहारनपुर स्थित अपने गांव में पिता विक्रम सिंह संग खेतों में लहलहाती फसलें उगाई हैं, वहीं क्वालालम्पुर (मलेशिया) में हाल ही आयोजित तीसरी एशियन योगा चैंपियनशिप में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान लखनऊ परिसर का नाम भी रोशन किया है।
वे कलात्मक व म्यूजिकल योगासन के अच्छे जानकार हैं। बकौल शुभम, संघर्ष से कभी मुंह नहीं फेरा। गुरुओं डॉ. गजेंद्र शर्मा व डॉ. रमेश सिंह की प्रेरणा से भरसक मेहनत की।
वह फिलहाल संस्कृत काव्यशास्त्र में शास्त्री (बीए ऑनर्स) के द्वितीय वर्ष में हैं। प्रथम वर्ष में उन्होंने 81 प्रतिशत अंक हासिल किए।
शतरंज में महारत
मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले श्याम सुंदर संस्थान से बीएड (शिक्षाशास्त्री) कर रहे हैं। वे हॉस्टल में रहते हैं और खाली समय में शतरंज की मोहरों पर अपनी बुद्धि आजमाते हैं।
श्याम पिछले वर्ष भोपाल में हुए पांचवें युवा महोत्सव में शतरंज में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं और इस बार भी विजेताओं में प्रमुख दावेदार के तौर पर देखे जा रहे हैं।
श्याम को संस्कृत व्याकरण की बारीकियों के बारे में जानने में खासी रुचि है। वह अंतरराष्ट्रीय बौद्घ शोध संस्थान की ओर से आयोजित प्रतियोगिताओं में भी पदक जीत चुके हैं।
वह विश्वविद्यालय से व्याकरण में शास्त्री (ग्रेजुएशन) कर चुके हैं।
विद्वान और पहलवान
हरियाणा के रहने वाले कुलदीप युवा महोत्सवों में आयोजित हुई कुश्ती प्रतियोगिता में दो बार स्वर्ण पदक जीतकर संस्थान का नाम रोशन कर चुके हैं।
कुश्ती ही नहीं उन्होंने मार्च में गुवाहाटी में कराई गई कबड्डी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। कुलदीप कहते हैं संस्कृत के प्रति लगाव तो बचपन से ही है।
ख्वाहिश है संस्कृत का प्रकांड विद्वान बनूं और कुश्ती में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग करूं।
बुद्ध का दर्शन और बैडमिंटन है प्यारा
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर, जो कि चीन की सीमा से सटा हुआ है की रहने वाली आस्था नेगी राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान से बौद्घ दर्शन में शास्त्रीय (ग्रेजुएशन) कर रही हैं।
वे चौथे युवा महोत्सव में चार सौ मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक विजेता रही हैं। इसके अलावा खो-खो, बैडमिंटन और हाई जंप में भी अपना करिश्मा दिखा चुकी हैं।
आस्था कहती हैं कि जैसे बुद्ध का दर्शन आत्मा को झकझोरने वाला है, वैसे ही खेल में होने वाली स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से शरीर व मस्तिष्क का विकास होता है।