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MTU: हाजिरी होगी ऑनलाइन, डिग्री का होगा कोड

Thu, 22 Aug 2013 09:24 AM IST
लखनऊ/दीप सिंह
लखनऊ/दीप सिंह Updated Thu, 22 Aug 2013 09:24 AM IST
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mtu goes online mode to stop fake degree

महामाया तकनीकी विश्वविद्यालय (एमटीयू) की डिग्री कुछ 'स्पेशल' होगी। इस डिग्री की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी।

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डिग्री को ऐसे कागज पर बनाया जाएगा जिससे अंकों को न मिटाया जा सकेगा और न ही धोया जा सकेगा। डिग्री में ही एक क्यूआर (क्विक रिस्पांस) कोड होगा।

कोड को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर डालते ही कोई भी पता कर सकेगा कि वह असली है या फर्जी। यही नहीं वेबसाइट पर तुरंत छात्र के हर सेमेस्टर के अंकों का ब्यौरा भी आ जाएगा।

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एमटीयू का बीटेक का पहला बैच पूरा होने जा रहा है। इसका पहला दीक्षांत समारोह 20 सितंबर को होगा। इसमें दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के पूर्व प्रबंध निदेशक ई श्रीधरन मुख्य अतिथि होंगे। इसमें करीब 25 हजार छात्रों को डिग्री दी जाएगी।

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स्टूडेंट्स को होगी सहूलियत
पहली बार डिग्री देने जा रहे विश्वविद्यालय ने इसे फूलप्रूफ बनाने के साथ ही यह भी कोशिश की है कि उसकी असलियत जांचने के लिए दूसरे संस्थानों या नियोक्ताओं को भी इंतजार न करना पडे़।

इससे छात्रों को भी सहूलियत होगी। दूसरे संस्थानों में दाखिला लेने या किसी कंपनी में नौकरी के लिए जाने पर डिग्री और मार्क्सशीट वेरिफिकेशन के लिए दौड़ना पड़ता है। कई संस्थान और कंपनियां खुद वेरिफिकेशन करवाती हैं जिसमें उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

अब डिग्री पर पड़े कोड से तत्काल मार्क्सशीट तक का वेरिफिकेशन हो जाएगा। इस बारे में एमटीयू के परीक्षा नियंत्रक जेपी पांडेय कहते हैं कि इस पारदर्शिता और सुरक्षा उपायों से निश्चित ही छात्रों और विश्वविद्यालय दोनों को सहूलियत होगी। इसके साथ ही हमारे विश्वविद्यालय की डिग्री की विश्वसनीयता कायम होगी।


हाजिरी पर रहेगी ऑनलाइन नजर

एमटीयू छात्रों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने की भी व्यवस्था की है। विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी तकनीकी कॉलेजों को यह निर्देश हैं कि वे छात्रों की उपस्थिति ऑनलाइन वेबसाइट पर डालेंगे।



इसमें क्लास लेने वाले हर शिक्षक को महीने की हाजिरी भरनी होगी। कॉलेज और विश्वविद्यालय की वेबसाइट आपस में जुड़ी हैं। इस तरह से विश्वविद्यालय के पास छात्रों की उपस्थिति का ब्यौरा भी रहेगा।

इससे छात्र या कॉलेज कोई भी गुमराह नहीं कर पाएगा। अक्सर छात्रों या कॉलेज प्रशासन के बीच इसी मुद्दे पर विवाद होता है। कॉलेज कहते हैं कि छात्र की उपस्थिति कम है।

वहीं, छात्र कॉलेज पर आरोप लगाते हैं कि अवैध वसूली के लिए उनकी उपस्थिति कम दिखाकर प्रताड़ित किया जा रहा है।

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