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शिक्षा के क्षेत्र में अपनाया जाएगा 'मोदी' मॉडल

Fri, 06 Dec 2013 11:01 AM IST
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 06 Dec 2013 11:01 AM IST
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modi model in field of education

अगर सब कुछ ठीक रहा तो उत्तराखंड के बच्चे रोजगार परक शिक्षा गुजरात के मोदी मॉडल से प्राप्त करेंगे।

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रोजगार परक शिक्षा
दरअसल उच्च शिक्षा विभाग चाहता है कि कॉलेज की पढ़ाई के बाद दूसरी शिफ्ट में वहां पीपीपी मॉडल से रोजगार परक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। इस योजना में सरकार निजी संस्थाओं को ढांचागत व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।

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जिसके बदले संबंधित कॉलेज के बच्चों को रोजगार परक पाठ्यक्रम में विशेष छूट मिलेगी। इससे प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर और ऊंचा हो सकेगा।

उच्च शिक्षा विभाग पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की संभावनाएं तलाश रहा है। प्रदेश के सकल पंजीकरण अनुपात (ग्रास इनरोलमेंट रेश्यो) अन्य राज्यों से बेतहर कहीं बेहतर है।
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राष्ट्रीय औसत 19 प्रतिशत है जबकि उत्तराखंड का जीईआर 23 प्रतिशत है। जिसे देखते हुए विभाग उच्च शिक्षा केसाथ उसे रोजगार परक बनाने की दिशा में विचार कर रहा है। इसके लिए पीपीपी की आश्यकता और संभावना पर काम चल रहा है।


परियोजना का परीक्षण और अध्ययन

विभाग ने गुजरात के पीपीपी मॉडल के साथ अन्य राज्यों में उच्च शिक्षा के अन्तर्गत चल रही परियोजना का परीक्षण और अध्ययन करने को भी कहा है।

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बताते हैं गुजरात में कॉलेज की पढ़ाई के बाद वहां निजी संस्थाएं रोजगार परक शिक्षा के पाठ्यक्रम आयोजित करती हैं। जिससे पढ़ाई के साथ बच्चे स्किल्ड और रोजगार से जुड़ रहे हैं।

उत्तराखंड में इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में एक-एक महाविद्यालय और देहरादून के तीन महाविद्यालयों समेत 15 महाविद्यालयों में रोजगार परक पाठ्यक्रम चयनित करने की बात कही गई है। इसके लिए अर्नेस्ट एवं यंग की जिलावार रिपोर्ट संज्ञान में लेने को कहा गया है।

प्रदेश में कौन से पाठ्यक्रम पढ़ाए जाएं और उनका फीस स्ट्रैक्चर क्या होगा यह भी सरकार तय करेगी। उपरैंखाल में पीपीपी मॉडल पर विद्यालय के संचालन के लिए एक ईओआई का प्रस्ताव निदेशालय एवं पीपीपी सेल की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा।

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