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ऐसी बर्बादी तो क्यों न आए 56 लाख बिल
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Fri, 11 Oct 2013 02:58 AM IST
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उत्तर सरकार विश्वविद्यालयों को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति करने की व्यवस्था करने जा रही है। इसके लिए उन्हें आपूर्ति का अलग से ट्रांसमिशन दिया जाएगा।
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लेकिन विश्वविद्यालय की लापरवाही के चलते यहां बिजली की खूब बर्बादी की जा रही है। पूरा प्रदेश बिजली कटौती से भले परेशान हो लेकिन राजधानी में स्थित लखनऊ यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों को इससे कोई लेना देना नहीं है।
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यहां क्लासरूम में खाली होने पर भी पंखे, ट्यूब लाइट और बल्ब जलते रहते हैं। आर्ट्स फैकल्टी हो या कॉमर्स फैकल्टी कहीं भी कोई इस पर ध्यान देने वाला नहीं है।
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विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को निर्देश हैं कि वे क्लास न चलने पर बिजली उपकरणों को बंद कर दें लेकिन आदेश का कहीं पालन नहीं हो रहा है।
यही कारण है कि विश्वविद्यालय के दोनों कैंपस की बिजली का बिल हर महीने 56 लाख रुपये तक आ रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति देने के फैसले के बाद जब गुरुवार को लविवि कैंपस का मुआयना तो लापरवाही की यह तस्वीर सामने आई।
दोपहर करीब 3:30 बजे आर्ट्स फैकल्टी में कमरा नंबर 14 व 15 और 40 व 41 में कोई क्लास नहीं चल रही थी। मगर इस क्लासरूम में लगे छह पंखे, चार ट्यूबलाइट व बल्ब जल रहे थे।
यह किस्सा यहां पर रोज का है। क्लास न चलने पर भी बिजली उपकरण जलते रहते हैं। आर्ट्स फैकल्टी में हिन्दी विभाग, संस्कृत विभाग, मानवशास्त्र विभाग, प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग और पाश्चात्य इतिहास विभाग के क्लासरूम में बिजली बर्बाद हो रही थी।
यहां तैनात चतुर्थश्रेणी कर्मचारी इतनी भी जहमत नहीं उठाते कि क्लास न होने पर बिजली बंद कर दें। यही हाल कॉमर्स फैकल्टी में भी देखने को मिला।
यहां पर कक्षाएं न चलने पर भी बिजली, पंखे चलते पाए गए। बिजली की बर्बादी रोकने के लिए शिक्षक व छात्र भी कोई पहल नहीं करते। विश्वविद्यालय के दोनों कैंपस का बिजली का बिल इस समय 56 लाख रुपये महीना आ रहा है।
आर्थिक तंगी का रोना रोने वाले इस विश्वविद्यालय में बिजली की बचत की ओर किसी का ध्यान नहीं है। ऐसे में चौबीस घंटे बिजली मिलने पर अगर इस तरह बिजली का दुरुपयोग हुआ तो विवि प्रशासन पर तो और भार बढ़ जाएगा।