...तो अभिभावकों को ब्लैकमेल कर रहा है CBSE
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सीबीएसई दून रीजन कार्यालय द्वारा पहली बार जारी रिजल्ट बोर्ड के गले की फांस बनता जा रहा है। रिजल्ट जारी होने के पांच दिन बाद भी गड़बड़ियों पर रार थम नहीं रही है।
अभिभावक तो इसे रिजल्ट घोटाला तक करार दे रहे हैं। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की है।
बुधवार को मीडिया को जारी पत्र में अभिभावक जयपाल, दिनेश, धर्मपाल, रेनू सिंह, सत्यपाल, रमेश, कालूराम आदि ने रिजल्ट में खामियों पर सवाल खड़े किए हैं।
उनका आरोप है कि बोर्ड आरटीआई के तहत छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं देने की बात तो कह रहा है, लेकिन इसमें भी अपने नियम थोपे जा रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि तीन-तीन विषयों में एक समान अंक दिया जाना बोर्ड की लापरवाही को दर्शाता है।
उन्होंने क्षेत्रीय निदेशक सहित गड़बड़ी के जिम्मेदार कर्मचारियों को निलंबित करने की मांग की है। मांग की कि पूरे देश में लागू आरटीआई नियमों के अनुसार ही उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाएं।
ग्रेड पर बोर्ड ने दी सफाई
अभिभावकों ने यह भी चिंता जताई कि रिजल्ट में गड़बड़ियों का खामियाजा जेईई एडवांस दे चुके छात्रों को उठाना पड़ सकता है। इस पर भी कार्रवाई की मांग की गई।
12वीं के छात्रों की मार्कशीट में भारी खामियां सामने आने के बाद बुधवार को बोर्ड ने अपनी सफाई दी।
दून रीजन के निदेशक मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 10वीं और 12वीं का ग्रेडिंग पैटर्न अलग है। उन्होंने बताया कि 12वीं में विषयवार ग्रेडिंग का क्राइटेरिया अलग-अलग होता है।
वह अभिभावकों से बातचीत कर रहे थे। अभिभावकों ने बोर्ड की वेबसाइट पर दिए नोटिस दिखाए तो कर्मचारियों ने इन्हें गलत करार दिया।
क्षेत्रीय निदेशक ने बताया कि 12वीं में कुल छात्रों की संख्या के हिसाब से हर विषय का अलग ग्रेड हो सकता है।
यानी परसेंटाइल के आधार पर अगर छात्र ने किसी विषय में 51 और दूसरे छात्र ने 53 अंक पाए हैं तो दोनों के ग्रेड अलग-अलग हो सकते हैं।
बिना अंक चढ़ाए ही जारी कर दिया गया रिजल्ट
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के नवोदित देहरादून रीजन के पहले रिजल्ट पर उठ रहे सवालिया निशान थम नहीं रहे।
बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के 12वीं के 800 से अधिक छात्रों का रिजल्ट खराब होने में हर रोज नया खुलासा हो रहा है।
अब पता चला है कि स्कूलों ने इन बच्चों के प्रैक्टिकल अंकों की सूची बोर्ड कार्यालय को भेजी थी, लेकिन संबंधित अफसर ने यह सूची अटैंड ही नहीं की।
ऐसे में छात्रों की मार्कशीट पर प्रैक्टिकल के नंबर चढ़ाए ही नहीं जा सके। नतीजा बच्चे फेल हो गए।
पीठ थपथपाने की जल्दबाजी
दून रीजन को पहली बार मूल्यांकन की जिम्मेदारी मिली थी। खास बात यह है कि दून रीजन में उत्तराखंड के 13 जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के 19 जिलों के सीबीएसई से संबद्ध स्कूल जोड़े गए हैं।
पहले ये सभी स्कूल इलाहाबाद रीजन से जुड़े थे। खास बात यह है कि दून रीजन अब इलाहाबाद रीजन से बड़ा हो गया है।
होना यह चाहिए था कि दून रीजन के कार्मिक रिजल्ट जारी करने में पूरी सावधानी बरतते, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
सूत्र बताते हैं कि दून रीजन के अफसरों की कोशिश बस यही रही कि वे जल्द से जल्द रिजल्ट जारी कर खुद को बेहतर साबित कर सकें।
मौका बेमौका रीजन के अधिकारी खुद अपनी पीठ भी थपथपाते रहे, लेकिन इस जल्दबाजी में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर दिया गया।
अब रिवाइज कर रहे मार्कशीट
बड़ी संख्या में बच्चों के फेल होने का मामला दिल्ली स्थित बोर्ड के केंद्रीय कार्यालय पहुंचा तो जांच में क्षेत्रीय स्तर पर लापरवाही सामने आई।
इसके बाद इन 800 बच्चों का रिजल्ट रिवाइज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारी पर भी बोर्ड जल्द ही कुछ कड़ा फैसला कर सकता है।
बोर्ड पर भी उठ रहे सवाल
सीबीएसई केंद्रीय कार्यालय ने दून रीजन कार्यालय का जिम्मा एक ऐसे अधिकारी को दे दिया जो अनुभवहीन और विवादित हैं।
सूत्र बताते हैं कि इन अधिकारी को विवाद के चलते दिल्ली कार्यालय से हटा दिया गया था। उन्हें पटना भेजा गया, लेकिन वहां भी विवाद के चलते वह तीन माह में ही रुखसत हो गए।
इसके बाद उन्हें नए खुले दून रीजन में भेज दिया गया। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि दून रीजन को पहली बार रिजल्ट जारी करना था तो यहां किसी अनुभवी अधिकारी को क्यों नहीं भेजा गया।